शराब घोटाला: बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, एसीबी की भूमिका पर उठाए सवाल, सीबीआइ जांच की मांग

Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को राजभवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने राज्य के...

Ranchi: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार को राजभवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने राज्य के बहुचर्चित और करोड़ों रुपये के शराब घोटाले को लेकर एक ज्ञापन सौंपा. मरांडी ने राज्य की जांच एजेंसी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग की है.

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एसीबी पर ‘भ्रष्टाचारियों को संरक्षण’ देने का आरोप

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि राज्य की जांच एजेंसी (एसीबी) निष्पक्ष जांच करने के बजाय सत्ता-संपोषित भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि साक्ष्यों और वैधानिक समय-सीमा के साथ जानबूझकर समझौता किया जा रहा है ताकि रसूखदार आरोपियों को बचाया जा सके. जब राज्य की सर्वोच्च भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी स्वयं 90 दिन बीत जाने के बाद भी चार्जशीट दाखिल न करके भ्रष्टाचारियों को सुरक्षित बाहर निकालने का माध्यम बन गई हो, तो न्याय की उम्मीद करना बेमानी है.

38 करोड़ से 750 करोड़ तक पहुंचा घोटाला

बाबूलाल मरांडी ने उल्लेख किया कि वर्ष 2022 में झारखंड की उत्पाद नीति में बदलाव कर एक विशेष सिंडिकेट को लाभ पहुंचाया गया. शुरुआत में यह घोटाला 38 करोड़ रुपये का आंका गया था, लेकिन अब जांच की परतें खुलने के बाद यह 750 करोड़ रुपये से भी अधिक का हो चुका है. मरांडी ने छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी नवीन केडिया का उदाहरण देते हुए कहा कि जनवरी 2026 में गोवा से गिरफ्तारी के बाद उसे ट्रांजिट बेल मिली और वह फरार हो गया. उन्होंने इसे एसीबी की लचर कार्यप्रणाली और मिलीभगत का जीता-जागता उदाहरण बताया.

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राज्यपाल से हस्तक्षेप की अपील

बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से संविधान के संरक्षक के रूप में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है. उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि एसीबी को तुरंत चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए. राज्य के खजाने की इस लूट और एसीबी की संदेहास्पद भूमिका की जांच तत्काल सीबीआइ को सौंपी जाए.

नेता प्रतिपक्ष ने ज्ञापन में इन तथ्यों का दिया हवाला

• गिरफ्तारियां: 20 मई 2025 को तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे और संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह की गिरफ्तारी हुई थी. इसके बाद सुधीर कुमार दास, नीरज कुमार और अन्य बाहरी आरोपियों को भी पकड़ा गया.
• चार्जशीट में देरी: कानूनन 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य है, लेकिन एसीबी ने ऐसा नहीं किया.
• डिफ़ॉल्ट बेल: चार्जशीट दाखिल न होने के कारण मुख्य आरोपी विनय कुमार चौबे को 19 अगस्त 2025 को न्यायालय से ‘डिफ़ॉल्ट बेल’ मिल गई. इसी तर्ज पर अब तक कुल 17 में से 14 आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं.

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