Koderma:कोडरमा जिले के मरकच्चो प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में टीकाकरण के दौरान बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है. आरोप है कि एक एएनएम (नर्स) ने महज 8 दिन के मासूम को डेढ़ महीने बाद लगाए जाने वाले कई टीके एक साथ लगा दिए. इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जानकारी के अनुसार, महुआटांड़ गांव निवासी शंभू यादव और प्रमोद यादव अपने बच्चों को टीकाकरण के लिए 16 अप्रैल को सीएचसी मरकच्चो लेकर पहुंचे थे. इनमें एक बच्चा केवल 8 दिन का था, जबकि दूसरा 29 दिन का. आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद एएनएम ने दोनों बच्चों को बीसीजी, ओरल पोलियो वैक्सीन, पेंटावैलेंट, रोटावायरस और न्यूमोकोकल कंजुगेट वैक्सीन समेत कई टीके एक साथ लगा दिए. गनीमत रही कि फिलहाल बच्चों की तबीयत सामान्य बताई जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इतनी कम उम्र में कई टीके एक साथ लगाए जाने से बच्चों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता था.

आंगनबाड़ी केंद्र जाने पर हुआ लापरवाही का खुलासा
महुआटांड़ की सहिया संगीता देवी ने बताया कि प्रमोद यादव अपने नवजात बच्चे को केवल बीसीजी टीका लगवाने के लिए सीएचसी गए थे, लेकिन वहां अन्य सभी टीके भी लगा दिए गए. बाद में जब बच्चे को डेढ़ महीने के बाद लगने वाला टीका दिलाने के लिए आंगनबाड़ी केंद्र ले जाया गया, तब इस लापरवाही का खुलासा हुआ. जांच पड़ताल में पता चला कि बच्चे को निर्धारित समय से पहले ही कई वैक्सीन दे दी गई थीं.
वहीं, महुआटांड़ पोषक क्षेत्र की एएनएम रत्ना सिन्हा ने कहा, कि बच्चे का जन्म कहीं और हुआ था और उन्होंने टीका नहीं लगाया. उनका कहना है कि बच्चे के माता-पिता उसे टीकाकरण के लिए सीएचसी मरकच्चो लेकर गए थे.
गलती करने वालों को नहीं बख्शा जाएगा- प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
इस मामले पर सीएचसी मरकच्चो की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मोनिका मिश्रा ने कहा कि एएनएम की लापरवाही की जानकारी मिली है. फिलहाल बच्चा स्वस्थ है, लेकिन संबंधित एएनएम को केंद्र से हटाकर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह की गलती करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.
ग्रामीणों ने की दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कहा, कि कई एएनएम और सहिया को टीकाकरण की पूरी जानकारी नहीं है, जिससे इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं. लोगों का कहना है कि ग्रामीण महिलाएं भरोसे के साथ अपने बच्चों का टीकाकरण करवाती हैं, लेकिन ऐसी लापरवाही उनके विश्वास के साथ खिलवाड़ है. स्वास्थ्य केंद्र में बीपीएम और कोल्ड चेन हैंडलर की भी अहम जिम्मेदारी होती है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि उनकी मौजूदगी में इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हो गई. ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है.
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