सिमडेगा: बोलबा प्रखंड के कुंदुरमुंडा गोसाई टोली गाँव में वज्रपात की चपेट में आने से एक चार वर्षीय मासूम बच्ची की मौत हो गई.जानकारी के अनुसार, सोमवार की शाम जमेश्वर माझी अपनी पत्नी और बेटियों के साथ सुखाया हुआ महुआ उठाने के लिए घर से कुछ दूरी पर स्थित चट्टान के पास गए थे. अचानक मौसम खराब हो गया और बिजली चमकने लगी. इसी दौरान जमेश्वर माझी की चार वर्षीय बेटी शुरमनी कुमारी वज्रपात की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गई.
बच्ची का शव बिना पोस्टमार्टम दफन
घटना के बाद 108 एंबुलेंस को बुलाया गया और बच्ची को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बोलबा लाया गया. चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए उसे सदर अस्पताल, सिमडेगा रेफर कर दिया. बताया गया कि उस समय डॉ. मयांग बड़ाइक की ड्यूटी थी, लेकिन वे अनुपस्थित थे. सदर अस्पताल सिमडेगा पहुंचने के बाद परिजनों ने बच्ची को मृत समझकर डॉक्टरों को नहीं दिखाया और वापस गांव लौट आए. इसके बाद मंगलवार की सुबह बिना किसी को सूचना दिए बच्ची को दफना दिया गया.
बोलबा थाना को घटना की सूचना मिलने पर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और परिजनों से बातचीत की. परिजनों ने बताया कि वे बच्ची के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते और किसी प्रकार का लाभ भी नहीं लेना चाहते. उन्होंने इस संबंध में बोलबा पुलिस को लिखित आवेदन भी दे दिया.
सुधांशु पाठक ने ग्रामीणों को जागरूक किया
घटना की जानकारी मिलने पर अंचल अधिकारी सुधांशु पाठक भी घटनास्थल पहुंचे और मामले की जानकारी ली. उन्होंने तत्काल राहत के रूप में अनाज उपलब्ध कराया और कहा कि किसी भी समस्या की स्थिति में स्थानीय जनप्रतिनिधि अथवा सीधे उनसे संपर्क किया जा सकता है.
सुधांशु पाठक ने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए कहा कि वज्रपात होने पर शरीर पर गोबर न लगाएं, बल्कि तुरंत अस्पताल ले जाएं, जहां सही इलाज संभव है. साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि पुरानी परंपराओं के आधार पर बीमारी का इलाज न कराएं, बल्कि अस्पताल जाकर ही उपचार कराएं. झाड़-फूंक, डायन-भूत, ओझा-गुनी जैसे अंधविश्वासों से दूर रहने की सलाह भी दी.इस मौके पर अंचल निरीक्षक सिधेश्वर पासवान सहित कई ग्रामीण भी उपस्थित थे.
