रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के मुआवजे से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में एनटीपीसी (NTPC) की केरेडारी कोयला खनन परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि की मुआवजा राशि को 11,000 रुपए से बढ़ाकर 15,783 रुपए प्रति डिसमिल कर दिया है. हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने हजारीबाग जिले के तरहेसा गांव से संबंधित 118 अपीलों पर सुनवाई करते हुए यह आदेश सुनाया है.
एनटीपीसी के तर्क को हाईकोर्ट ने कर दिया था खारिज
यह विवाद हजारीबाग के तरहेसा गांव की 84.80 एकड़ रैयती भूमि के अधिग्रहण से जुड़ा है. जिला भू-अर्जन अधिकारी ने शुरुआत में मात्र ₹4,823 प्रति डिसमिल की दर तय की थी. बाद में ट्रायल कोर्ट ने इसे बढ़ाकर ₹11,000 किया था, जिसे भू-स्वामियों और एनटीपीसी दोनों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. सुनवाई के दौरान एनटीपीसी की ओर से यह तर्क दिया गया था, कि मुआवजे की गणना 2016 के पुराने सेल डीड के आधार पर होनी चाहिए.
हालांकि, हाईकोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि बाजार मूल्य के निर्धारण के लिए ‘धारा 11’ की अधिसूचना की तिथि (12 जून 2019) ही आधार मानी जाएगी और मुआवजे की गणना के लिए अधिसूचना से ठीक पहले के तीन वर्षों (जून 2016 से जून 2019) के सेल डीड ही मान्य होंगे. एनटीपीसी द्वारा पेश किए गए पुराने दस्तावेज अप्रासंगिक करार दिए गए.अदालत ने कहा कि जब सेल डीड के माध्यम से बाजार मूल्य अधिक मिल रहा हो, तो कम सर्किल रेट का सहारा नहीं लिया जा सकता.
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