असम की राजनीति में आदिवासी अस्मिता और महिला कार्ड के जरिए बड़ा उलटफेर करने की तैयारी, जेएमएम की सबसे बड़ी क्राउड पुलर है कल्पना सोरेन

Ranchi: झारखंड की सियासत में अपनी प्रखर वाकपटुता और संघर्षशील छवि से लोहा मनवा चुकीं कल्पना सोरेन अब पूर्वोत्तर की राजनीति में...

Ranchi: झारखंड की सियासत में अपनी प्रखर वाकपटुता और संघर्षशील छवि से लोहा मनवा चुकीं कल्पना सोरेन अब पूर्वोत्तर की राजनीति में मोर्चा संभालने जा रही हैं. असम विधानसभा चुनाव के लिए जेएमएम ने अपनी रणनीति साफ कर दी है. पार्टी की सबसे बड़ी क्राउड पुलर कल्पना सोरेन को स्टार प्रचारक बनाया गया है. यह कदम न केवल असम में जेएमएम की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए है, बल्कि वहां की बड़ी आदिवासी आबादी को साधने के लिए एक सोची-समझी बिसात मानी जा रही है.

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असम में कल्पना का असर, झारखंडी जड़ों का जुड़ाव

असम के चाय बागानों में काम करने वाले श्रमिकों की एक बड़ी आबादी मूल रूप से झारखंड के आदिवासियों की है. ये टी ट्राइब्स आज भी अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े हैं. कल्पना सोरेन, जो झारखंड में जल-जंगल-जमीन की लड़ाई का नया चेहरा बनी हैं, इन मतदाताओं के साथ एक स्वाभाविक भावनात्मक रिश्ता जोड़ने में सक्षम हैं.

महिला मतदाताओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता

झारखंड में मइयां सम्मान योजना और अपने पति हेमंत सोरेन की अनुपस्थिति में जिस तरह उन्होंने पार्टी की कमान संभाली, उसने उन्हें महिलाओं के बीच एक फाइटर के रूप में स्थापित किया है. असम की महिला मतदाता, जो वहां की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती हैं, कल्पना की संघर्ष गाथा से खुद को जोड़ सकती हैं.

इंडिया’ गठबंधन का उभरता चेहरा

सिर्फ जेएमएम ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर इंडिया गठबंधन के लिए भी कल्पना सोरेन एक आक्रामक और प्रभावी वक्ता साबित हुई हैं. असम में बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत नैरेटिव सेट करने के लिए वे गठबंधन की एक बड़ी ताकत बन सकती हैं.

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विपक्ष की चिंता और जेएमएम की उम्मीद

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि असम में बीजेपी का किला काफी मजबूत है, लेकिन कल्पना सोरेन की मौजूदगी वहां के आदिवासी बहुल इलाकों में सेंधमारी कर सकती है. जेएमएम को उम्मीद है कि कल्पना की सभाओं में जुटने वाली भीड़ वोटों में तब्दील होगी, जिससे पार्टी का विस्तार झारखंड के बाहर भी मजबूती से हो सकेगा.

चुनावी रैलियों का अंदाज़

असम की रैलियों में कल्पना सोरेन के भाषणों का केंद्र, आदिवासी पहचान, विस्थापन का दर्द और संवैधानिक अधिकार होने की संभावना है. वे झारखंड मॉडल की चर्चा कर असम के मतदाताओं को यह बताने की कोशिश करेंगी कि उनकी अपनी पार्टी जेएमएम ही उनके हितों की असली रक्षक है.

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