रांचीः झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में फाइलें और नीतियां ही नहीं दौड़तीं, बल्कि यहां के आईएएस अधिकारियों की कलम भी खूब चलती है. झारखंड कैडर के कई आइएएस हैं, जिन्होंने न केवल राज्य के विकास की रूपरेखा तैयार की, बल्कि अपने अनुभवों, ज्ञान और रचनात्मकता को शब्दों में पिरोकर किताबों की शक्ल दी. इन अधिकारियों ने यह सिद्ध किया है कि एक कुशल प्रशासक केवल दफ्तर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह समाज को ज्ञान के माध्यम से भी दिशा दे सकता है. डॉ. मनीष रंजन की किताबें जहां हजारों युवाओं के अधिकारी बनने के सपने को साकार कर रही हैं, तो वहीं वंदना दादेल जैसी अधिकारियों का लेखन पाठकों को जीवन के प्रति एक सकारात्मक नजरिया प्रदान करता है.
डॉ. मनीष रंजनः झारखंड कैडर के सबसे चर्चित लेखक अधिकारियों में डॉ. मनीष रंजन का नाम सबसे ऊपर आता है. उनकी लिखी किताबें झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं (जेपीएससी, जेएसएससी) की तैयारी करने वाले हर छात्र के पास मिल जाएंगी. इनकी किताबों में झारखंड सामान्य ज्ञान प्रमुख है. यह राज्य की सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तकों में से एक है. इसके अलावा आइएएस प्लानर, एनसीइआरटी समरी, सीसैट किताबें भी लिखी है.

वंदना दादेलः वर्तमान में राज्य की अपर मुख्य सचिव जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रही वंदना दादेल ने अध्यात्म और व्यक्तिगत जीवन के अनुभवों पर कलम चलाई है. इनकी किताब एंड गॉड कम इंनटू ऑवर मैरिड लाइफ पुस्तक उनके व्यक्तिगत जीवन, आदिवासी पृष्ठभूमि और आध्यात्मिक यात्रा के अनुभवों का एक मार्मिक दस्तावेज है.
अमित खरेः चारा घोटाले का खुलासा करने वाले और नई शिक्षा नीति के सूत्रधार रहे अमित खरे अपनी बौद्धिक क्षमता के लिए जाने जाते हैं. हालांकि वे मुख्य रूप से नीति निर्माण के लिए विख्यात हैं, लेकिन शिक्षा और प्रशासन पर उनके आलेख और योगदान किताबों के रूप में संकलित हैं. उन्होंने प्रशासन और भ्रष्टाचार पर अपने अनुभवों को विभिन्न मंचों पर साझा किया है जो भविष्य के अधिकारियों के लिए पाठ्य सामग्री की तरह हैं.

राजीव रंजनः झारखंड की भौगोलिक स्थिति और यहां की जटिल संरचना को समझने के लिए राजीव रंजन ने महत्वपूर्ण कार्य किया है. इन्होंने राज्य की भौगोलिक विशिष्टताओं, पठारों और खनिज संपदा पर केंद्रित एक मानक पुस्तक झारखंड का भूगोल लिखी है जो शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए अत्यंत उपयोगी है.

