Ranchi: झारखंड में बदलती जीवनशैली और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के बीच हार्ट अटैक एक साइलेंट किलर के रूप में उभरा है. आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हृदय संबंधी बीमारियों से होने वाली मौतों का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा है. राज्य भर में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 लोग हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के कारण दम तोड़ रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न सर्वे रिपोर्टों के अनुसार, झारखंड के बड़े शहरों में स्थिति अधिक गंभीर है. बीते कुछ महीनों के डेटा विश्लेषण से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.
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सर्वाधिक प्रभावित जिले
रांची, धनबाद और जमशेदपुर में हार्ट अटैक के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अकेले धनबाद में दो महीनों के भीतर 80 से अधिक मौतें दर्ज की गईं. पहले हृदय रोग 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन अब 25 से 45 वर्ष के युवाओं में इसके मामले 30 फीसदी तक बढ़ गए हैं.
इलाज की कमी
झारखंड के 24 में से 13 जिलों के सरकारी अस्पतालों में एक भी हार्ट स्पेशलिस्ट नहीं है. गंभीर स्थिति में मरीजों को रांची या राज्य के बाहर रेफर करना पड़ता है. सरकार ने अनुबंध पर विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने का निर्णय लिया है. अब केवल रांची के रिम्स पर निर्भरता कम करने के लिए धनबाद, जमशेदपुर, पलामू और हजारीबाग के मेडिकल कॉलेजों में कैथलैब स्थापित की जा रही है. बढ़ते खतरों को देखते हुए झारखंड सरकार ने स्वास्थ्य बजट 2026-27 में हृदय रोगों के इलाज के लिए विशेष प्रावधान किए हैं.
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क्यों बढ़ रहा है मौत का आंकड़ा?
• देर से इलाजः हार्ट अटैक आने के पहले एक घंटे को गोल्डन आवर कहा जाता है. राज्य के ग्रामीण इलाकों में कार्डियक एम्बुलेंस और नजदीकी कैथलैब न होने के कारण मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं.
• पोस्ट-कोविड प्रभाव: डॉक्टरों के अनुसार, कोरोना महामारी के बाद लोगों में खून के थक्के जमने और हृदय की मांसपेशियों में कमजोरी की समस्या बढ़ी है.
• अनियंत्रित जीवनशैली: अत्यधिक तनाव, शारीरिक श्रम की कमी, खान-पान में जंक फूड का अधिक सेवन और तंबाकू व सिगरेट की लत इस खतरे को कई गुना बढ़ा रही है.
