Bokaro: औद्योगिक जिला माने जाने वाले बोकारो की एक सच्चाई यह भी है कि यहां की लगभग 75 प्रतिशत आबादी रेल सुविधा से दूर है. जिला मुख्यालय और दोनों अनुमंडल कार्यालय भी रेलवे नेटवर्क से काफी दूर स्थित हैं.
चार प्रखंडों में रेलवे का नामोनिशान नहीं
जिले के कसमार, पेटरवार और नावाडीह समेत चार प्रखंड ऐसे हैं जहां रेलवे लाइन का कोई अस्तित्व नहीं है. इन इलाकों के लोग आज भी रेल कनेक्टिविटी से वंचित हैं.
दो रेलवे लाइनों की जरूरत पर जोर
जानकारों के अनुसार बोकारो में दो रेलवे लाइनों की आवश्यकता है. वर्तमान में तलगड़िया–तुपकाडीह रेलवे लाइन पर काम चल रहा है. इस रूट के बनने से कई इलाकों को लाभ मिलेगा.
पुरानी परियोजनाएं अधर में
राजाबेड़ा–बरकाकाना रेल रूट का सर्वे 1961 में हुआ था, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है. यदि यह रूट बनता है तो सभी प्रखंड जिला मुख्यालय से रेल मार्ग से जुड़ सकते हैं.
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तलगड़िया–तुपकाडीह रूट से उम्मीदें
इस रूट के पूरा होने से जिला मुख्यालय के पास इस्पात नगर स्टेशन केवल 2 किलोमीटर दूर रह जाएगा. वर्तमान में बोकारो स्टील सिटी स्टेशन लगभग 10 किलोमीटर दूर है. इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.
अनुमंडलों को मिलेगा फायदा
चास और बेरमो अनुमंडल के कई प्रखंडों को भी इस नेटवर्क से फायदा होगा. गोमिया स्टेशन की दूरी कई क्षेत्रों से लगभग 10 किलोमीटर है, जो नए रूट से काफी कम हो सकती है.
सदन में भी उठा मुद्दा
गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने संसद में बोकारो जिले में नए रेल रूट की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि कसमार, पेटरवार और जरीडीह जैसे प्रखंड रेल सुविधा से वंचित हैं, जिन्हें जल्द रेल नेटवर्क से जोड़ना जरूरी है.
परियोजनाओं को धरातल पर लाने की मांग
सांसद ने पारसनाथ–मधुबन–गिरिडीह रेल परियोजना का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि यह परियोजना 2018–19 में स्वीकृत हुई थी, लेकिन राज्य सरकार की हिस्सेदारी लंबित रहने के कारण अभी तक आगे नहीं बढ़ सकी है. उन्होंने इसे जल्द पूरा करने की मांग की ताकि क्षेत्र में विकास, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिल सके.
