Ranchi: ईरान-इजरायल युद्ध के बाद प्रभावित हुई घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था अब तक पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाई है. इसी बीच उपभोक्ताओं की ओर से तेजी से बढ़ी री-बुकिंग ने गैस एजेंसियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. हालात यह हैं कि राजधानी में घरेलू गैस सिलेंडरों का बैकलॉग बढ़कर करीब 80 हजार तक पहुंच गया है.
गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार, जैसे ही उपभोक्ताओं की 25 दिन की अवधि पूरी हो रही है, वे तुरंत गैस की री-बुकिंग करा रहे हैं. पिछले दो-तीन दिनों में बुकिंग रिक्वेस्ट में अचानक उछाल देखा गया है. कई एजेंसियों में प्रतिदिन 1200 से अधिक बुकिंग अनुरोध आ रहे हैं, जिससे वितरण व्यवस्था पर भारी दबाव बन गया है.
डीएसी नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
तेल कंपनियों द्वारा सिलेंडर डिलीवरी के लिए डीएसी (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) को अनिवार्य किया गया है, लेकिन उपभोक्ताओं को समय पर डीएसी नहीं मिलने से परेशानी बढ़ गई है. इंडेन समेत अन्य एलपीजी कंपनियों के कई उपभोक्ता बुकिंग के तीन-चार दिन बाद भी डीएसी नहीं मिलने की शिकायत कर रहे हैं. बुधवार को एजेंसियों पर ऐसे उपभोक्ताओं की भीड़ देखी गई, जो डीएसी के इंतजार में परेशान थे.
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पैनिक बुकिंग से बढ़ा दबाव, एजेंसियों में 5 हजार तक बैकलॉग
गैस की संभावित कमी की आशंका ने उपभोक्ताओं के बीच पैनिक बुकिंग को बढ़ावा दिया है. स्थिति यह है कि एक-एक एजेंसी में बैकलॉग 5 हजार सिलेंडरों तक पहुंच गया है. एजेंसियों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो समय पर गैस आपूर्ति करना और मुश्किल हो जाएगा.
निर्माण सामग्री भी हुई महंगी
गैस संकट के बीच महंगाई का असर निर्माण क्षेत्र पर भी साफ दिखाई दे रहा है. हार्डवेयर सामग्री की कीमतों में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े अन्य सामान भी महंगे हो गए हैं. इससे आम लोगों के साथ-साथ निर्माण कार्यों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है.
स्थिति पर नजर, सुधार की उम्मीद
गैस एजेंसियों और तेल कंपनियों का कहना है कि आपूर्ति व्यवस्था को सामान्य करने के प्रयास जारी हैं. हालांकि, जब तक पैनिक बुकिंग पर नियंत्रण नहीं होता और सप्लाई चेन पूरी तरह बहाल नहीं होती, तब तक उपभोक्ताओं को राहत मिलने में समय लग सकता है.
