News Desk: हम सभी ने हनुमान चालीसा की यह पंक्ति कई बार सुनी है— “अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता.” इसका भाव यह है कि माता सीता ने हनुमान जी को ऐसी दिव्य शक्तियां प्रदान कीं, जिनकी मदद से वे हर कठिन काम को आसान बना सकते हैं. लेकिन सवाल यह है कि ये ‘अष्ट सिद्धियां’ वास्तव में क्या होती हैं और क्यों इन्हें इतना खास माना जाता है? आइए, इसे सरल शब्दों में समझते हैं.
आज हनुमान जन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर आइए जानते हैं बजरंगबली की उन दिव्य शक्तियों के बारे में, जिनके कारण उन्हें ‘महाबली’ कहा जाता है.
जानिए हनुमान जी की 8 दिव्य सिद्धियों का रहस्य

- अणिमा: इस सिद्धि के जरिए हनुमान जी अपने शरीर को बेहद सूक्ष्म यानी अणु के समान छोटा कर सकते थे. लंका में प्रवेश करते समय उन्होंने इसी शक्ति का प्रयोग किया और खुद को इतना छोटा बना लिया कि कोई उन्हें पहचान भी नहीं सका.
- महिमा: यह अणिमा का उल्टा होता है. इसमें हनुमान जी अपना शरीर बहुत बड़ा, पहाड़ जैसा कर लेते हैं. रामायण में बताया गया है कि लंका जाते समय और वहां पहुंचकर उन्होंने इस शक्ति का इस्तेमाल किया था.
- गरिमा: इस शक्ति के जरिए हनुमान जी अपने शरीर को इतना भारी बना लेते हैं कि कोई भी उन्हें हिला नहीं पाता. कथा में बताया जाता है कि भीम को सबक सिखाने के लिए उन्होंने अपनी पूंछ का वजन इतना बढ़ा दिया था कि भीम उसे जरा सा भी उठा नहीं सके.
- लघिमा: इस सिद्धि से हनुमान जी अपने शरीर को बेहद हल्का, पंख जैसा बना लेते हैं. इसी वजह से वे आसानी से दूर-दूर तक उड़ सकते हैं और बिना थके तेजी से चल सकते हैं.
- प्राप्ति: इस शक्ति के जरिए वे जो चाहें, उसे हासिल कर सकते हैं. कहा जाता है कि इससे वे हर तरह की बातें समझने और दूर की चीजों का ज्ञान पाने में सक्षम हो जाते हैं.
- प्राकाम्य: यह इच्छा पूरी करने की शक्ति है. इसकी मदद से हनुमान जी कहीं भी जा सकते हैं—आकाश में उड़ना हो या गहराई में जाना, उनके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं रहता.
- ईशित्व: यह शक्ति नेतृत्व और नियंत्रण से जुड़ी है. इसी के कारण हनुमान जी को दैवीय शक्ति का स्वामी माना जाता है और वानर सेना ने भी उनका मार्गदर्शन स्वीकार किया.
- वशित्व: इस शक्ति से हनुमान जी दूसरों को अपने प्रभाव में ला सकते हैं. लेकिन उन्होंने इस सिद्धि का उपयोग हमेशा सही कामों, धर्म की रक्षा और बुराई को रोकने के लिए ही किया.
हनुमान जी की इन सिद्धियों का मुख्य उल्लेख रामकथाओं में मिलता है. रामचरितमानस के सुंदरकांड में तुलसीदास जी ने माता सीता द्वारा दिए गए आशीर्वाद का वर्णन किया है, जिसमें इन शक्तियों की झलक मिलती है. इसके अलावा मार्कंडेय पुराण और महर्षि पतंजलि के योग सूत्र में भी अष्ट सिद्धियों का जिक्र मिलता है, जिन्हें साधना और भक्ति के जरिए प्राप्त किया जाता है.
DISCLAIMER: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इसमें बताए गए उपाय, मान्यताएं और कथन विभिन्न स्रोतों, धार्मिक ग्रंथों और पारंपरिक धारणाओं पर आधारित हैं. इनकी सत्यता या सटीकता का दावा नहीं किया जाता. पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी बात को अंतिम सत्य मानने से पहले अपने विवेक का उपयोग करें.
