Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) की मुस्तैदी से एक 13 वर्षीय मासूम बच्ची का जीवन बर्बाद होने से बच गया. गरीबी की आड़ में उसके माता-पिता जिस बच्ची को 45 साल के अधेड़ के हाथों सौंपने की तैयारी कर चुके थे, अब वह बच्ची न केवल सुरक्षित है, बल्कि अपनी पढ़ाई और सिलाई सीखने के सपनों को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है.
गरीबी के कारण तय कर दी गई थी शादी
मामला रांची के पिठोरिया क्षेत्र का है. गरीबी और बच्ची के लालन-पोषण में असमर्थता का हवाला देते हुए उसके माता-पिता ने उसकी शादी उत्तर प्रदेश के रहने वाले एक 45 वर्षीय व्यक्ति से तय कर दी थी. 31 मार्च को विवाह की तिथि भी निर्धारित कर दी गई थी.
घर से भागकर पहुंची बुंडू
अपनी जिंदगी को अंधकार में जाते देख मासूम बच्ची घर से भाग निकली और किसी तरह बुंडू पहुंच गई. बुंडू में जब डालसा की पीएलवी (पैरा लीगल वॉलंटियर) की नजर इस डरी-सहमी बच्ची पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत इसकी सूचना डालसा सचिव को दी.
टीम बनाकर किया गया रेस्क्यू
मामला संज्ञान में आते ही डालसा सचिव ने एक विशेष टीम का गठन किया. इसके बाद डालसा की टीम बुंडू पहुंची और बच्ची से आत्मीय बातचीत कर पूरी घटना की जानकारी ली. इसके बाद बुंडू महिला थाना की सब इंस्पेक्टर बुलबुल कुमारी और डालसा की टीम ने चाइल्ड हेल्पलाइन की मदद से बच्ची को रेस्क्यू किया.
प्रेमाश्रय में रखा गया, सपनों को मिला सहारा
रेस्क्यू के बाद बच्ची को फिलहाल रांची स्थित प्रेमाश्रय में रखा गया है. काउंसलिंग के दौरान बच्ची ने आगे पढ़ने और सिलाई सीखने की इच्छा जाहिर की है.
मामले में कार्रवाई के निर्देश
जांच में यह तथ्य सामने आया कि इस विवाह को तय कराने में गोला निवासी लुतेश कुमार महतो की मुख्य भूमिका थी. डालसा सचिव ने महिला थाना प्रभारी बुंडू को इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
