फर्जी FIR मामला: अवर सचिव,दो इंस्पेक्टर और सेवानिवृत डीएसपी ने हजारीबाग कोर्ट में किया सरेंडर

रांची: फर्जी एफआईआर मामले में अवर सचिव, दो इंस्पेक्टर और एक सेवानिवृत डीएसपी ने हजारीबाग कोर्ट में सरेंडर कर दिया.पेयजल एवं जल...

रांची: फर्जी एफआईआर मामले में अवर सचिव, दो इंस्पेक्टर और एक सेवानिवृत डीएसपी ने हजारीबाग कोर्ट में सरेंडर कर दिया.पेयजल एवं जल स्वच्छता विभाग के अवर सचिव कुमुद झा, इंस्पेक्टर रामदयाल मुंडा, इंस्पेक्टर अकील अहमद और सेवानिवृत डीएसपी अखिलेश सिंह के खिलाफ जमानतीय वारंट जारी होने के बाद सभी ने बीते 24 मार्च को कोर्ट में सरेंडर किया और कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दिया हैं. हजारीबाग ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट विवेक कुमार की अदालत ने मंटू सोनी उर्फ शनि कांत के कोर्ट परिवादवाद पर झारखंड हाईकोर्ट से स्टे को हटा देने के बाद वारंट जारी किया गया था. इससे पूर्व हजारीबाग जिले के बड़कागांव में फर्जी एफआईआर कांड संख्या 135/2016 मामले पर हजारीबाग कोर्ट के कार्रवाई पर रोक के अंतरिम आदेश को हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल चौधरी की अदालत ने हटा दिया था. हाईकोर्ट ने एनटीपीसी के पूर्व जीएम टी गोपाल कृष्ण पर दो हजार एवं अवर सचिव कुमुद झा पर एक हजार का जुर्माना भी लगाया था.

बीडीओ का आवेदन बदलकर अन्य लोगों का नाम जोड़ दिया था

हजारीबाग न्यायालय के शिवानी शर्मा की अदालत द्वारा तत्कालीन गढ़वा बीडीओ कुमुद झा, मधुपुर इंस्पेक्टर रामदयाल मुंडा, इंस्पेक्टर अकील अहमद, सेवानिवृत्त डीएसपी अखिलेश सिंह और एनटीपीसी के सेवानिवृत्त जीएम टी गोपाल कृष्ण के खिलाफ समन जारी किया था. चिरुडीह में 17 मई 2016 को हुई घटना में बड़कागांव पुलिस ने तत्कालीन मजिस्ट्रेट वर्तमान गढ़वा बीडीओ का आवेदन बदलकर अन्य लोगों का नाम जोड़ दिया था. यह मामला बड़कागांव थाना की कांड संख्या 135/16 से संबंधित है.

कार्यपालक दंडाधिकारी का आवेदन बदलकर की गई थी गड़बड़ी, कोर्ट ने संज्ञान लेकर जारी किया था समन 

हजारीबाग न्यायालय की न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी शिवानी शर्मा की कोर्ट ने तत्कालीन गढ़वा बीडीओ कुमुद झा, मधुपुर इंस्पेक्टर रामदयाल मुंडा, स्पेशल ब्रांच इंस्पेक्टर अकील अहमद, सेवानिवृत्त डीएसपी अखिलेश सिंह, एनटीपीसी के सेवानिवृत्त जीएम टी गोपाल कृष्ण को प्रथम दृष्टया आरोपी मानते हुए समन जारी किया था. सभी आरोपियों को 20 नवम्बर को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश जारी किया गया था. सभी आरोपियों को मंटू सोनी द्वारा दायर परिवाद वाद संख्या 1644/22 में सुनवाई में अधिवक्ता पवन यादव, रंजन कुमार अनिरुद्ध कुमार की दलील और गवाहों को सुनने के बाद कोर्ट ने धारा 166, 166ए,167, 218 और 220 में प्रथम दृष्टया दोषी माना और संज्ञान लेते हुए समन जारी करने का आदेश जारी किया था. प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए सभी आरोपी उस समय बड़कागांव, हजारीबाग में पदस्थापित थे.

मई 2016 के चिरुडीह मारपीट मामले में थानेदार ने सूचक के आवेदन बदलकर जोड़ दिए थे 29 नाम

तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद झा के आवेदन को बदलकर तत्कालीन थानेदार रामदयाल मुंडा ने बड़कागांव थाना कांड संख्या 135/16 की केस डायरी के पैरा एक में कुमुद झा के हस्तलिखित आवेदन प्राप्त होने की बात लिखी है. जबकि मूल एफआईआर कॉपी टाइप किया हुआ है. थानेदार की कारगुजारी की पुष्टि करते हुए कुमुद झा ने कोर्ट में बयान दर्ज कराते हुए कहा था कि उनके आवेदन को बदलकर थानेदार ने अपने मुंशी से टाइप करवाकर एफआईआर दर्ज की है. कुमुद झा के आवेदन में दो लोगों के नाम थे. थानेदार ने 29 अन्य लोगों का नाम जोड़ दिया था. एफआईआर कॉपी और कोर्ट में कुमुद झा का सिग्नेचर अलग-अलग है. एफआईआर कॉपी व डेट लिखावट कोर्ट में किए सिग्नेचर और डेट लिखावट में फर्क है.इस प्रकरण में मंटू सोनी ने हजारीबाग सदर सीजीएम ऋचा श्रीवास्तव की अदालत में परिवादवाद दायर किया था, जिसे ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शिवानी शर्मा की कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था. वर्तमान में विवेक कुमार की अदालत में मामले सुनवाई चल रही है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *