बुंडू सिविल कोर्ट निर्माण मामला : हाई कोर्ट ने देरी पर लगाई जमकर फटकार, कहा- ‘हमें बेवकूफ समझने की कोशिश न करें’

Ranchi: बुंडू में सिविल कोर्ट निर्माण मामले में हो रहे देरी को लेकर झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस एम सोनक...

Ranchi: बुंडू में सिविल कोर्ट निर्माण मामले में हो रहे देरी को लेकर झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस एम सोनक एवं न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई की. सुनवाई के दौरान अदालत में पूर्व आदेश के अनुसार मुख्य सचिव, विधि सचिव, राजस्व सचिव, नगर विकास सचिव न्यायायुक्त रांची, रजिस्ट्रार जनरल झारखंड हाई कोर्ट, उपायुक्त रांची उपस्थित रहे. मामले में अदालत ने पूछा कि निर्माण में देरी क्यों हो रही है? इस पर राज्य सरकार के महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बचाव करते हुए अदालत को कहा कि बुंडू में सिविल कोर्ट के निर्माण की जरूरत नहीं है क्योंकि नंबर आफ केसेस बहुत कम हैं और रांची सिविल कोर्ट से दूरी महज 35 किलोमीटर है. वहीं अब राजमार्ग का निर्माण होने के बाद आना-जाना भी सुगम हो गया है.

यह भी पढ़ें : झारखंड ट्रेजरी घोटाला: चारा घोटाला पार्ट-2 की आहट, भाजपा ने न्यायिक जांच की मांग की

प्रार्थी के अधिवक्ता रिंकू भगत ने मजबूती से रखा पक्ष, सरकार को जमकर लताड़ा

मामले में याचिकाकर्ता रामचरण महतो द्वारा दायर जनहित याचिका का पक्ष रख रहे अधिवक्ता रिंकू भगत ने महाधिवक्ता राजीव रंजन के द्वारा रखे गए पक्ष का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि सरकार जहां एक लंबे अरसे से इस मामले को ठंडे बस्ते में डालकर रखा है, वहीं अब मुकर जाना समझ से परे है. उन्होंने सबसे पहले कहा कि महाधिवक्ता के द्वारा दूरी 35 किलोमीटर बताई जा रही है जबकि यह दूरी 45 किलोमीटर की है, वहीं नंबर आफ केसेस की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 3000 मामले लंबित हैं. उन्होंने अन्य अनुमंडल में बने न्यायालय का उदाहरण देते हुए बताया कि चांडिल, चक्रधरपुर और नगर उटारी जैसे कम दूरी और काम केसेस के मामलों में भी सिविल कोर्ट का निर्माण और उसका संचालन किया जा रहा है. ऐसे में बुंडू में निर्माण से पलट जाना समझ से परे है. उन्होंने यह भी बताया कि बुंडू सिविल कोर्ट निर्माण के लिए साल 2010 में कैबिनेट से प्रस्ताव पारित किया जा चुका है. वहीं जमीन मुआयना की बात भी कही गई है. अब एक लंबे अरसे के बाद सरकार पलटी मार रही है.

यह भी पढ़ें : ट्रेजरी मामले पर रार: कांग्रेस का भाजपा पर वार, जांच एजेंसियों को राजनीतिक हथियार बनाना बंद करे भाजपा

अदालत ने जताई कड़ी नाराजगी

महाधिवक्ता का बचाव एवं प्रार्थी के अधिवक्ता के द्वारा दलील पेश किए जाने के उपरांत अदालत ने कड़ी नाराजगी जाहिर की. अदालत ने कहा कि हमें बेवकूफ समझने की कोशिश हो रही है. हम इस मामले में मूकदर्शक बने नहीं रह सकते हैं. अदालत ने राज्य सरकार को अपना विचार बदलने के लिए चार सप्ताह का समय देते हुए अगली सुनवाई 7 मई मुकर्रर की है. अदालत ने कहा कि हम सरकार को समय दे रहे हैं. सरकार अपने दिए हुए बयान पर या तो हलफनामा दायर करे या अपना विचार बदले. अन्यथा हमें इस बाबत कार्रवाई करने में कोई गुरेज नहीं होगी.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *