NewsWave Expose झारखंड विधायक निधि: 300 करोड़ की राशि अनलॉक्ड, विकास की फाइलें ब्लॉक्ड

Ranchi: झारखंड के 81 विधानसभा क्षेत्रों के लिए जारी होने वाली विधायक निधि का एक बड़ा हिस्सा आज भी सरकारी फाइलों और...

Ranchi: झारखंड के 81 विधानसभा क्षेत्रों के लिए जारी होने वाली विधायक निधि का एक बड़ा हिस्सा आज भी सरकारी फाइलों और बैंक खातों में धूल फांक रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, जहां एक तरफ जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है, वहीं दूसरी तरफ पिछले दो वर्षों में आवंटित राशि का लगभग 30 से 35 फीसदी हिस्सा खर्च ही नहीं हो सका है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन क्षेत्रों में फंड खर्च हुआ, वहां कमीशनखोरी और कागजी विकास की शिकायतों ने भ्रष्टाचार के नए रिकॉर्ड बनाए हैं.

करोड़ों की राशि खर्च नहीं

  • कुल आवंटित राशि: लगभग 810 करोड़ (औसत 5 करोड़ प्रति विधायक/वर्ष).
  • कुल खर्च राशि: 510 से 550 करोड़ के बीच.
  • बिना खर्च की राशि: 260 से 300 करोड़ अभी भी जिलों के खातों में पड़े हैं या उनकी प्रशासनिक स्वीकृति लंबित है.

विकास की राह में ब्रेकर बनीं ये चार बड़ी गड़बड़ियां

  • कमीशन का सिंडिकेट: ग्रामीण कार्य विभाग और विधायकों के प्रतिनिधियों के बीच 3 से 10 फीसदी तक के कमीशन का खेल अब एक स्थापित सिस्टम बन गया है. हाल ही में ईडी की जांच में पाकुड़ और साहिबगंज जैसे क्षेत्रों में टेंडर मैनेज करने के बदले भारी रकम के लेनदेन का खुलासा हुआ है.
  • अनुपयोगी परियोजनाओं का चयन: कई विधायकों ने जनता की जरूरत के बजाय अपने खास ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए उन स्थानों पर सामुदायिक भवन या यात्री शेड बनवा दिए, जहां उनकी कोई आवश्यकता नहीं थी.
  • अनस्पेंट फंड: रांची, जमशेदपुर और हजारीबाग जैसे शहरी क्षेत्रों में भी विधायकों ने फंड की अनुशंसा करने में देरी की, जिससे लगभग 80 करोड़ की राशि समय पर आवंटित नहीं हो पाई.
  • फंड उपयोग की स्थिति: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल आवंटित राशि का लगभग 65 से 70 फीसदी ही धरातल पर खर्च हो पाया है. शेष राशि या तो प्रशासनिक प्रक्रियाओं में फंसी है या योजनाओं की स्वीकृति के इंतजार में है.

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विधायकों ने पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक अनुशंसा इन क्षेत्रों में की

  • पेयजल: ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर आधारित चापाकल और डीप बोरिंग.
  • शिक्षा: स्कूलों में चहारदीवारी और अतिरिक्त कमरों का निर्माण.
  • बुनियादी ढांचा: पीसीसी सड़कें, सामुदायिक भवन और श्मशान घाटों का सौंदर्यीकरण.
  • विद्युतीकरण: गांवों में ट्रांसफार्मर लगवाना और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था.

ऑडिट और ग्राउंड रिपोर्ट की कड़वी सच्चाई

  • कागजी योजनाएं: कई जिलों में ऐसी सड़कों और नालियों का भुगतान कर दिया गया, जो केवल फाइलों में बनी थीं.
  • पीसी का खेल: ठेकेदारों और विभागीय कनिष्ठ अभियंताओं के बीच सांठगांठ के कारण 15 से 20 फीसदी तक कमीशन की चर्चा आम रही है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता अत्यंत घटिया पाई गई.
  • अनुपयोगी संपत्तियां: करोड़ों खर्च कर बनाए गए सामुदायिक भवन और यात्री शेड आज देखरेख के अभाव में खंडहर बन रहे हैं या उन पर दबंगों का कब्जा है.
  • फंड का डायवर्जन: नियमों के विरुद्ध जाकर ऐसे निजी संस्थाओं या धार्मिक स्थानों की चहारदीवारी में पैसे खर्च किए गए, जो विधायक निधि के मार्गदर्शिका के दायरे में नहीं आते.
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