RANCHI: महानगरों में उपलब्ध आधुनिक चिकित्सा तकनीक अब झारखंड में भी मरीजों को राहत दे रही है. जय प्रकाश नगर, बरियातू स्थित मां ललिता पालीडॉक (Maa Lalit PolyDoc) अस्पताल की टीम ने एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए 20 सेंटीमीटर आकार की बढ़ी हुई तिल्ली (Spleen) को मात्र 2 सेंटीमीटर से भी छोटे छेद के जरिए निकाल दिया. इस अत्याधुनिक प्रक्रिया को टोटल लैप्रोस्कोपिक स्प्लेनेक्टॉमी (Total Laparoscopic Splenectomy) कहा जाता है.
38 वर्षीय मरीज लंबे समय से गंभीर संक्रमण
कचहरी निवासी 38 वर्षीय दिवाकर कुमार लंबे समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे. उन्हें बार-बार संक्रमण, खून की कमी (लो हीमोग्लोबिन), अत्यधिक कम प्लेटलेट्स और श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBC) की कमी की शिकायत थी. इसके अलावा उनका बिलीरुबिन स्तर 40 तक पहुंच गया था, जो जानलेवा स्थिति मानी जाती है. बीमारी के कारण उन्हें बार-बार खून चढ़ाना पड़ता था और उनका जीवन काफी कष्टदायक हो गया था.
ट्रॉपिकल मैसिव स्प्लेनोमेगली बीमारी बनी कारण
जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि वह ट्रॉपिकल मैसिव स्प्लेनोमेगली (Tropical Massive Splenomegaly with Hypersplenism) नामक गंभीर बीमारी से ग्रसित थे, जिसमें तिल्ली असामान्य रूप से बढ़ जाती है और शरीर की रक्त कोशिकाओं को नष्ट करने लगती है. सामान्य आकार से दोगुनी यानी करीब 20 सेंटीमीटर की हो चुकी तिल्ली के कारण मरीज का पेट हमेशा भरा हुआ और भारी महसूस होता था, जिससे भूख भी नहीं लगती थी.
डॉक्टरों ने चुनौतीपूर्ण स्थिति में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का लिया निर्णय
चिकित्सकों की सलाह पर दिवाकर कुमार ने डॉ. अजीत कुमार से संपर्क किया, जिन्होंने पहले भी उनका सफल ऑपरेशन किया था. इस बार भी डॉक्टर और उनकी टीम ने चुनौतीपूर्ण स्थिति को स्वीकार करते हुए लैप्रोस्कोपिक तकनीक से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया. बड़ी तिल्ली होने के कारण यह सर्जरी काफी जोखिम भरी मानी जाती है, लेकिन टीम ने दक्षता के साथ इसे सफलतापूर्वक पूरा किया.
डॉक्टरों ने बताया लैप्रोस्कोपिक तकनीक से कम दर्द और तेजी से रिकवरी संभव
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ. जहां सर्जरी से पहले प्लेटलेट काउंट महज 20 हजार था, वहीं डिस्चार्ज के समय यह बढ़कर एक लाख से अधिक हो गया, जो लगभग सामान्य स्तर है. अन्य रक्त मानक भी सामान्य हो गए हैं और मरीज को पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.
डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह की उन्नत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से बड़े ऑपरेशन से बचाव होता है, दर्द कम होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है. यह उपलब्धि झारखंड में आधुनिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है.
