सिमडेगा: बालू की किल्लत से जूझती जनता, स्टॉकयार्ड पर उठे सवाल

Simdega: जिले में बीते करीब सात वर्षों से नदी घाटों की बंदोबस्ती नहीं होने के कारण बालू की भारी किल्लत उत्पन्न हो...

Simdega: जिले में बीते करीब सात वर्षों से नदी घाटों की बंदोबस्ती नहीं होने के कारण बालू की भारी किल्लत उत्पन्न हो गई है. इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ रहा है, जहां घर निर्माण जैसे आवश्यक कार्य भी ठप पड़ते नजर आ रहे हैं.

स्टॉकयार्ड बने संदेह का केंद्र

दूसरी ओर सरकार द्वारा बनाए गए स्टॉकयार्ड अब लोगों के बीच संदेह और चर्चा का विषय बन गए हैं. स्थानीय लोग इसे “कुबेर का खजाना” कहकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं.

रोज बिक्री, फिर भी भर जाता स्टॉक

ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इन स्टॉकयार्डों में प्रतिदिन सैकड़ों गाड़ियों के माध्यम से बालू की बिक्री होती है. हैरानी की बात यह है कि अगले ही दिन वहां फिर से उतनी ही मात्रा में बालू उपलब्ध हो जाती है. लोगों का कहना है कि यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि अधिकारियों की मिलीभगत का परिणाम हो सकता है.

Also Read: झारखंड जगुआर के जवान प्रकाश मिंज की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत, क्षेत्र में शोक की लहर

अवैध खनन की आशंका

संदेह जताया जा रहा है कि बिना वैध बंदोबस्ती के स्थानीय नदी घाटों से ही बालू निकालकर स्टॉकयार्ड में भर दिया जाता है और फिर उसे कागजी प्रक्रिया के तहत बेचा जा रहा है.

सबसे बड़ा सवाल, बालू कहां से आ रही

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब जिले के किसी भी नदी घाट की आधिकारिक बंदोबस्ती नहीं हुई है, तो आखिर स्टॉकयार्ड में इतनी बड़ी मात्रा में बालू कहां से आ रही है. अब तक बाहर से बालू लाए जाने का कोई स्पष्ट प्रमाण भी सामने नहीं आया है.

जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आम जनता को भारी आर्थिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *