रांची: रांची के प्रसिद्ध ईएनटी एवं स्लीप सर्जन डॉ. अभिषेक के. रामाधीन ने मुंबई में आयोजित 14वें वर्ल्ड कांग्रेस – ISSS–IASSACON 2026 में हिस्सा लेकर झारखंड का नाम रोशन किया. इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हुए और स्लीप डिसऑर्डर पर गहन चर्चा हुई.

सम्मेलन का उद्घाटन भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने किया. कार्यक्रम में देश-विदेश के कई प्रसिद्ध विशेषज्ञ मौजूद थे, जिनमें डॉ. मिलिंद कीर्तने, प्रो. मारिया सुवार्ना (अमेरिका) और डॉ. विकास अग्रवाल शामिल थे.
झारखंड से एकमात्र प्रतिनिधि
डॉ. रामाधीन इस सम्मेलन में झारखंड से भाग लेने वाले एकमात्र डॉक्टर थे. उन्होंने “Understanding Endotypes and Phenotypes for Tailored Therapy” विषय पर फैकल्टी के रूप में हिस्सा लिया और स्लीप एपनिया के आधुनिक इलाज पर अपने अनुभव साझा किए.
खर्राटा मजाक नहीं, जानलेवा बीमारी का संकेत
डॉ. रामाधीन ने कहा कि आमतौर पर लोग खर्राटे को सामान्य समस्या मान लेते हैं, लेकिन यह स्लीप एपनिया जैसी गंभीर बीमारी का लक्षण हो सकता है. इस बीमारी में सोते समय बार-बार सांस रुकती है, जिससे शरीर और दिमाग को ऑक्सीजन की कमी होती है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय पर इलाज न किया जाए, तो अचानक मृत्यु का खतरा बढ़ सकता है, याददाश्त और सोचने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, पुरुषों में यौन कमजोरी हो सकती है और बच्चों के मानसिक विकास और IQ पर बुरा असर पड़ सकता है.
जागरूकता बेहद जरूरी
डॉ. रामाधीन ने कहा, “खर्राटों को हल्के में न लें. यदि नींद के दौरान सांस रुकती है या दिन में ज्यादा नींद आती है, तो तुरंत जांच कराएं.”

