Ranchi: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए 131वें संविधान संशोधन विधेयक को महिलाओं के हक के नाम पर लोकतांत्रिक डकैती करार दिया है. पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं को केवल एक ढाल की तरह इस्तेमाल कर रही है, जबकि उसका असली मकसद परिसीमन के जरिए संघीय ढांचे को चोट पहुंचाना और लोगों के मताधिकार का हरण करना है.
आरक्षण नहीं, सत्ता पर काबिज रहना है मुख्य एजेंडा
सुप्रियो भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि जब 2023 में महिला आरक्षण कानून सर्वसम्मति से पास हो चुका था, तो उसे लागू करने के बजाय नया संशोधन विधेयक लाना केंद्र की नीतिगत चालाकी को दर्शाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार का असली एजेंडा महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि परिसीमन है. सरकार की मंशा 2029 के चुनावों में मताधिकार का हरण कर ‘येन-केन-प्रकारेण’ सत्ता में बने रहने की है. लोकसभा की सीटें 50 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव तो है, लेकिन राज्यसभा और विधानपरिषद की सीटें क्यों नहीं बढ़ाई जा रही?
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पुराने आंकड़ों और मनुवादी सोच पर प्रहार
झामुमो नेता ने केंद्र की हड़बड़ी पर तंज कसते हुए कहा कि जब जनगणना की प्रक्रिया पाइपलाइन में है, तो सरकार 15 साल पुरानी जनगणना के आधार पर आरक्षण और परिसीमन के लिए इतनी व्याकुल क्यों है? उन्होंने भाजपा को घेरते हुए पूछा कि क्या उसने अपनी मनुवादी सोच त्याग दी है? उन्होंने कहा कि जिस मनुस्मृति में महिलाओं के प्रति संकुचित दृष्टिकोण रखा गया है, क्या भाजपा आज उसी विचारधारा के साथ महिलाओं को हक देने का ढोंग कर रही है?
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संसदीय परंपराओं के चीरहरण का आरोप
भट्टाचार्य ने सदन की कार्यवाही पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार में संसदीय परंपराएं दम तोड़ रही हैं. उन्होंने रक्षा मंत्री के 140 करोड़ लोगों के प्रधानमंत्री वाले बयान को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि 2024 में देश की 62 फीसदी जनता ने उनके खिलाफ वोट दिया था, महज 38 फीसदी के समर्थन से पूरे देश का प्रतिनिधि होने का दावा करना जनता को गुमराह करना है. विपक्ष ने जब सरकार की ‘लोकतंत्र चोरी’ की करतूत पकड़ी, तो गृहमंत्री को लज्जा से आंखें नीची कर हंसना पड़ा. झामुमो पिछड़े वर्गों की हकमारी करने वाले इस अन्यायपूर्ण विधेयक का हर स्तर पर विरोध करेगा.
