Ranchi: झारखंड के विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार, पारदर्शिता और शैक्षणिक गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से आज एक बड़ा संवैधानिक कदम उठाया गया है. राज्यपाल-सह-कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड विधानसभा द्वारा पारित ऐतिहासिक झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 पर अपनी आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है. राज्यपाल की इस मुहर के साथ ही अब यह विधेयक राज्य में कानून का रूप ले चुका है, जिससे प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों के प्रशासनिक और शैक्षणिक ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त हो गया है.
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संवैधानिक प्रक्रिया का पूर्ण होना
झारखंड विधानसभा से पारित होने के बाद इस महत्वपूर्ण विधेयक को राजभवन भेजा गया था. राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य के युवाओं के भविष्य और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता एवं बेहतरी को ध्यान में रखते हुए शुक्रवार को 2026 को इस पर अपने हस्ताक्षर किए.
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विश्वविद्यालयों में सुधार की लहर
इस नए अधिनियम (2026) के माध्यम से राज्य के विश्वविद्यालयों में सत्रों के नियमितीकरण, समय पर परीक्षा का आयोजन और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया को कानूनी मजबूती मिलेगी. यह कदम राज्य के विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है.
विद्यार्थियों के लिए लाभ
विधेयक के लागू होने से विद्यार्थियों को डिग्री मिलने में होने वाली देरी से निजात मिलेगी. साथ ही, शिक्षण स्टाफ की नियुक्ति और शोध के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भी इसमें विशेष प्रावधान किए गए हैं. राज्यपाल ने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता झारखंड के उच्च शिक्षा जगत को एक्सीलेंस’ (उत्कृष्टता) का केंद्र बनाना है. यह विधेयक इसी विजन को जमीन पर उतारने की एक कोशिश है.
