कोषागार घोटालाः फाइलें दबाना दाल में काला होने का संकेतः बाबूलाल मरांडी

RANCHI:नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कोषागार घोटाला मामले में राज्य सरकार की मंशा पर कड़े सवाल उठाए हैं.उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा जांच के...

RANCHI:नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कोषागार घोटाला मामले में राज्य सरकार की मंशा पर कड़े सवाल उठाए हैं.उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बावजूद फाइलों को सीआईडी को न सौंपे जाने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे जांच को प्रभावित करने की कोशिश करार दिया है.

पांच दिन बीतने के बाद भी वित्त विभाग की चुप्पी पर सवाल
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेश के पांच दिन बाद भी वित्त विभाग द्वारा संबंधित फाइलें CID को नहीं भेजी गई हैं.उन्होंने आरोप लगाया कि इस देरी के पीछे कोई बड़ा खेल हो सकता है.जब मुख्यमंत्री स्वयं जांच का आदेश दे चुके हैं,तो फाइलों को रोकने का क्या औचित्य है? क्या जानबूझकर भ्रष्ट अधिकारियों या सफेदपोशों को बचाने के लिए साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ का समय दिया जा रहा है?

चारा घोटाला जैसी बड़ी साजिश की आशंका
मरांडी ने इस घोटाले की तुलना झारखंड-बिहार के कुख्यात चारा घोटाले से करते हुए इसे एक गंभीर वित्तीय अपराध बताया.उन्होंने कहा- कि यदि इस मामले की निष्पक्ष और तह तक जाकर जांच की जाए,तो यह राज्य के इतिहास का एक बहुत बड़ा घोटाला साबित हो सकता है. फाइलों में देरी होना यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं.

जांच एजेंसियों की साख पर भी उठाए सवाल
बाबूलाल ने राज्य की जांच एजेंसियों (CID और ACB) की कार्यशैली पर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि इन एजेंसियों की विश्वसनीयता पहले से ही सवालों के घेरे में रही है.ऐसे में यह मुख्यमंत्री की सीधी जिम्मेदारी है कि वे बिना किसी राजनीतिक दबाव के जांच को आगे बढ़ाएं.फाइलों को रोकने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो.यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी प्रभावशाली अधिकारी जांच की दिशा न मोड़ सके.

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