Lohardaga: स्थानीय सुंदरी देवी सरस्वती शिशु मंदिर में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुंवर सिंह की जयंती उत्साहपूर्वक मनाई गई. कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र पांडे एवं वाटिका प्रमुख सुनीता कुमारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन एवं वीर कुंवर सिंह के चित्र पर पुष्पार्चन कर किया.
वीरता और प्रेरणा की गाथा
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र पांडे ने भैया-बहनों को बाबू वीर कुंवर सिंह के जीवन से परिचित कराया. उन्होंने बताया कि कुंवर सिंह जी का जन्म बिहार के भोजपुर जिले के जगदीशपुर के एक जमींदार परिवार में हुआ था. 80 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने जिस स्फूर्ति और साहस के साथ अंग्रेजों के दांत खट्टे किए, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है. कार्यक्रम के दौरान जानकारी दी गई कि वर्ष 1858 में बाबू वीर कुंवर सिंह ने जगदीशपुर के पास ब्रिटिश सेना (कैप्टन ली ग्रांड की सेना) को बुरी तरह पराजित कर अपने किले पर पुनः विजय प्राप्त की थी और यूनियन जैक उतारकर अपना झंडा फहराया था. यही कारण है कि उनकी स्मृति में इस दिन को उनकी वीरता और विजय के प्रतीक विजयोत्सव के रूप में पूरे देश में गौरव के साथ मनाया जाता है.
देशभक्ति के नारों से गूंजा परिसर
वाटिका प्रमुख सुनीता कुमारी ने प्रसिद्ध पंक्तियाँ “80 बरस की आयु में फिर जागा जोश पुराना था, सब कहते हैं कुंवर सिंह भी बड़ा वीर मर्दाना था” सुनाकर बच्चों में जोश भर दिया. पूरा विद्यालय सभागार वंदे मातरम् और भारत माता की जय के जयकारों से गूंज उठा. इस अवसर पर विद्यालय के सभी आचार्य बंधु-भगिनी एवं भैया-बहन उपस्थित रहे.
