Saraikela: जिले के चांडिल न्यू बाईपास पर पिछले करीब 50 घंटे से लगा महाजाम आखिरकार समाप्त हो गया. आज सुबह करीब 5 घंटे की लगातार कड़ी मेहनत के बाद यातायात पूरी तरह बहाल कर दिया गया. जिससे आम लोगों ने राहत की सांस ली.
किलोमीटरों लंबी वाहनों की कतार
घोड़ानेगी से लेकर नीमडीह फाटक तक वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई थीं. जिसके कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था. ट्रकों, बसों और छोटे वाहनों की 8-10 किमी लंबी लाइन लग गई थी. एंबुलेंस और स्कूली वाहन भी घंटों फंसे रहे.
हादसा और रेलवे फाटक बना वजह
स्थानीय लोगों के अनुसार हालिया सड़क हादसा और पितकी रेलवे फाटक का बार-बार बंद होना इस गंभीर जाम की मुख्य वजह बना. मंगलवार को हुए दर्दनाक हादसे के बाद से ही न्यू बाईपास पर वाहनों का दबाव बढ़ गया था. ऊपर से पितकी फाटक पर हर 15-20 मिनट में ट्रेन गुजरने से जाम और विकट हो गया. स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि लोग घंटों नहीं बल्कि दो दिनों से सड़क पर फंसे रहे.
युवाओं और पत्रकारों ने संभाला मोर्चा
इसी बीच आज सुबह एक अलग पहल देखने को मिली. आसपास के गांवों के युवाओं ने खुद आगे आकर मोर्चा संभाल लिया. इस अभियान में विस्थापित अधिकार मंच के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो भी सक्रिय रूप से शामिल हुए. वे स्थानीय पत्रकारों के साथ सड़क पर उतरकर भालुककोचा से पितकी फाटक तक डटे रहे.
5 घंटे में खुला जाम
राकेश रंजन महतो, उनके सहयोगी कृष्णा कालिंदी और युवा टीम ने ट्रैफिक व्यवस्था को नियंत्रित करते हुए वाहनों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाया. एक-एक कर भारी वाहनों को निकालकर वैकल्पिक रास्ता दिया गया. करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद जाम पूरी तरह खुल गया.
प्रशासन पर सवाल और मांग
राकेश रंजन महतो ने कहा प्रशासन की नाकामी से लोग 50 घंटे तक परेशान रहे. जब कोई नहीं आया तो हम युवाओं और पत्रकार साथियों ने मिलकर जिम्मेदारी ली. पितकी फाटक पर ओवरब्रिज और न्यू बाईपास पर ट्रैफिक पुलिस की स्थायी व्यवस्था जरूरी है. हम डीसी से मिलकर मांग रखेंगे.
लोगों ने जताया आभार
जाम खुलने के बाद ट्रक चालकों और यात्रियों ने युवाओं व पत्रकारों का आभार जताया. स्थानीय लोगों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को ऐसी स्थिति दोबारा न हो इसके लिए स्थायी समाधान निकालना होगा.
