News Desk: आज शुक्रवार के दिन बगलामुखी जयंती का पावन पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है. मां बगलामुखी, जिन्हें पीताम्बरा देवी के नाम से भी जाना जाता है, दस महाविद्याओं में आठवें स्थान पर विराजमान हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को उनका प्राकट्य दिवस मनाया जाता है. मां को ‘स्तम्भन’ की देवी कहा जाता है, जिनकी कृपा से शत्रुओं की बुद्धि और वाणी शांत हो जाती है.
मां को ‘पीताम्बरा’ क्यों कहा जाता है?
‘पीत’ यानी पीला और ‘अम्बर’ यानी वस्त्र. मां बगलामुखी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है. मान्यता है कि उनका स्वरूप स्वर्ण के समान तेजस्वी है और वे सदैव पीले वस्त्र धारण करती हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार, सतयुग में जब भयंकर तूफान से सृष्टि संकट में पड़ गई थी, तब भगवान विष्णु ने तपस्या की. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां बगलामुखी ‘हरिद्रा सरोवर’ (हल्दी की झील) से प्रकट हुईं, जहां चारों ओर पीले रंग का प्रभाव था. इसी कारण उन्हें पीताम्बरा कहा जाता है. उनकी पूजा में पीले फूल, पीले वस्त्र, हल्दी की माला और पीले भोग का विशेष महत्व होता है. पीला रंग शुभता और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है.
बगलामुखी जयंती 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष वैशाख शुक्ल अष्टमी का समय इस प्रकार है:
- अष्टमी तिथि की शुरुआत: 23 अप्रैल 2026, रात 08:49 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त: 24 अप्रैल 2026, शाम 07:21 बजे
- उदया तिथि 24 अप्रैल को होने के कारण आज ही मुख्य पूजा और व्रत किया जा रहा है
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक
इस शुभ अवसर पर भक्त मां बगलामुखी की विधि-विधान से पूजा कर सुख, समृद्धि और शत्रु बाधा से मुक्ति की कामना करते हैं.
