Ranchi: राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी के नामांकन पत्र को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो गई है. स्क्रूटनी (नामांकन पत्रों की जांच) के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच जबरदस्त कानूनी दलीलें देखने को मिली. एक तरफ जहां प्रणव झा के वकील ने नाथवाणी के शपथ पत्र (एफिडेविट) में गंभीर कमियां गिनाते हुए नामांकन रद्द करने की मांग की, वहीं परिमल नाथवाणी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अपने पक्ष को पूरी तरह वैध बताया.
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नाथवाणी के वकील प्रशांत पल्लव की दलील
परिमल नाथवाणी का पक्ष रखते हुए उनके अधिवक्ता प्रशांत पल्लव ने स्क्रूटनी की प्रक्रिया को पूरी तरह नियमसंगत बताया. उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष कई बिंदु रखे.
• आपत्ति का आधार कमजोर: विपक्षी दल की आपत्ति का मुख्य फोकस सिर्फ इस बात पर था कि आश्रितों (डिपेंडेंट) का कॉलम खाली था, जिसका हमने तार्किक जवाब दे दिया है.
• सुप्रीम कोर्ट का फैसला पक्ष में: सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार, स्क्रूटनी की तिथि तक उम्मीदवार अपनी बात या जवाब रख सकता है. नामांकन तब रद्द किया जाता है जब रिमाइंडर (याद दिलाने) के बाद भी प्रत्याशी जवाब न दे.
• प्रक्रिया का पालन: हमारे उम्मीदवार ने समय रहते सारी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध करा दी थी और पूरी प्रक्रिया को समय पर पूरा किया गया है. हमने कानूनन अपनी सही बात रख दी है, अब निर्णय का इंतजार है.
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• अधूरा फॉर्म और गायब कॉलम: फॉर्म 26-ए में उम्मीदवार को अपने परिवार के आश्रितों की जानकारी देनी होती है. नाथवाणी जी के एफिडेविट में 5 के बजाय सिर्फ 2 कॉलम थे, बाकी गायब कर दिए गए. इसके अलावा संपत्ति (एसेट्स) की जानकारी भी अधूरी है. उन्होंने अपनी और पत्नी की संपत्ति बताई, लेकिन एचयूएफ (हिंदू अविभाजित परिवार) की जानकारी छिपा ली.
• नियमों का उल्लंघन: 8 जून को दोपहर 3 बजे नामांकन बंद होने के बाद एफिडेविट अपलोड किए जाते हैं ताकि जनता देख सके. तकनीकी गलतियों को नामांकन खत्म होने और स्क्रूटनी शुरू होने से पहले सुधारा जा सकता है, लेकिन स्क्रूटनी के दौरान नया दस्तावेज स्वीकार नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, स्क्रूटनी में गलती पाए जाने पर नामांकन सीधे रद्द होना चाहिए.
• रिटर्निंग ऑफिसर पर आरोप: आज सुबह 11:30 बजे कार्यवाही स्थगित कर स्क्रूटनी में जानबूझकर देरी की गई. रिटर्निंग ऑफिसर ने कानून के खिलाफ जाकर नाथवाणी की मदद की और उनका नया एफिडेविट स्वीकार किया. नए दस्तावेज लेना पूरी तरह अवैध है और इस आधार पर नामांकन तुरंत रद्द होना चाहिए.
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लंबी बहस के बाद फैसले पर सस्पेंस बरकरार
इस पूरे मामले को लेकर रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में काफी लंबी और तीखी बहस चली. जब विपक्षी वकील सुरेंद्र चौहान ने रिटर्निंग ऑफिसर से पूछा कि इस मामले पर अंतिम फैसला कितने बजे आएगा, तो उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला. फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल कानूनी जंग के बाद दोनों पक्षों की सांसें थमी हुई हैं और हर किसी की नजरें रिटर्निंग ऑफिसर के अंतिम फैसले पर टिकी हैं.



