Ranchi: सचिवालय सेवा की कार्यशैली और पद संरचना को आधुनिक बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक हाई-प्रोफाइल कमेटी बनाई है. अपर मुख्य सचिव सह राजस्व पर्षद के सदस्य मस्त राम मीणा की कप्तानी में गठित यह चार सदस्यीय टीम तय करेगी कि आने वाले दशकों में सचिवालय का ढांचा कैसा होगा. हालांकि, कमेटी के गठन के साथ ही प्रतिनिधित्व को लेकर एक नया विवाद भी जन्म ले चुका है.
कमेटी में कौन-कौन हैं शामिल
• अध्यक्ष: मस्त राम मीणा (सदस्य, राजस्व पर्षद)
• सदस्य: सचिव (कार्मिक विभाग)
• सदस्य: सचिव (वित्त विभाग)
• सदस्य: सचिव (भू-राजस्व विभाग)
चार मुद्दों पर होगा मंथन
• पदों का पुनरीक्षण: कार्य की विशिष्टता और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से स्वीकृत पदों की संख्या तय करना.
• प्रशाखा पुनर्गठन: काम को सुचारू बनाने के लिए प्रशाखाओं के ढांचे को फिर से परिभाषित करना.
• प्रमोशन का रोडमैप: प्रमोशन के लिए जरूरी समय-सीमा की समीक्षा और नई अनुशंसा.
• एएसओ की बहाली: सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों (एएसओ) के रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार को ठोस सुझाव देना.
‘एकतरफा’ फैसले का डर
एक तरफ सरकार सुधार की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ सचिवालय सेवा संघ ने इस कमेटी की संरचना पर सवाल उठा दिया है. संघ का कहना है कि केंद्र सरकार की तर्ज पर इस कैडर रिव्यू कमेटी में सचिवालय सेवा का भी एक सदस्य होना चाहिए, ताकि जमीनी हकीकत और तथ्यात्मक पहलुओं को मजबूती से रखा जा सके. संघ को इस बात की भी आशंका है कि पिछली बार की तरह इस बार भी एएसओ और SO (प्रशाखा पदाधिकारी) के पदों के अनुपात में कटौती न कर दी जाए. वर्तमान में केंद्र के अनुरूप 2:1 (दो एएसओ पर एक एसओ) की व्यवस्था है, लेकिन चर्चा है कि विभाग इसे 3:1 करने का प्रस्ताव ला सकता है, जिसका कर्मचारी कड़ा विरोध कर रहे हैं.
