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खेत की जुताई में मिला प्राचीन शिवलिंग, घोडसीमर धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Koderma: सतगावां प्रखंड स्थित प्रसिद्ध घोडसीमर धाम के पास शुक्रवार सुबह खेत की जुताई के दौरान प्राचीन शिवलिंग मिलने से इलाके में...

Koderma: सतगावां प्रखंड स्थित प्रसिद्ध घोडसीमर धाम के पास शुक्रवार सुबह खेत की जुताई के दौरान प्राचीन शिवलिंग मिलने से इलाके में आस्था का माहौल बन गया. बताया जा रहा है कि किसान अजीत यादव खेत में हल चला रहे थे, तभी हल एक पत्थर से टकराया. मिट्टी हटाने पर जमीन के अंदर दबा करीब 2 फीट ऊंचा भूरा पत्थर का शिवलिंग मिला, जिसकी जलाधारी भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी.

शिवलिंग मिलने की खबर फैलते ही घोडसीमर, मीरगंज, ढाब सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए. ग्रामीणों ने शिवलिंग को साफ कर पूजा-अर्चना शुरू कर दी और फूल-माला अर्पित की. स्थानीय लोगों ने इसे घोडसीमर धाम का चमत्कार बताते हुए श्रद्धा व्यक्त की. ग्रामीणों का कहना है कि शिवलिंग की बनावट और स्थिति को देखकर यह काफी पुराना प्रतीत होता है. लोगों ने प्रशासन से पुरातत्व विभाग की टीम बुलाकर इसकी जांच कराने की मांग की है.

घोडसीमर धाम का ऐतिहासिक महत्व

कोडरमा मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर गया-देवघर मार्ग पर दुम्मदुमा गांव के पास सकरी नदी किनारे स्थित घोडसीमर धाम धार्मिक और पुरातात्विक महत्व के लिए जाना जाता है. मान्यता है कि भगवान शिव से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं इस स्थल से जुड़ी हुई हैं.

यहां 1336 ई. अंकित पत्थर का मंदिर, करीब 100 क्विंटल वजनी पत्थर का चौखट और विशाल शिवलिंग मौजूद है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग का रंग सूर्य की रोशनी के अनुसार बदलता है. महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ा मेला भी लगता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं.

स्थानीय पुजारी विवेकानंद पांडेय ने बताया कि मंदिर और क्षेत्र से जुड़ी कई पुरानी मान्यताएं हैं. उन्होंने कहा कि यहां मौजूद संरचनाओं और रहस्यों की जांच एवं संरक्षण की जरूरत है. ग्रामीणों ने राज्य सरकार से इस ऐतिहासिक स्थल की खुदाई और विकास कार्य जल्द शुरू कराने की मांग की है, ताकि घोडसीमर धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सके.

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