NewsWave Desk: पिछला महीना ग्लोबल टेक इंडस्ट्री के लिए काफी उथल-पुथल भरा रहा. Meta, Oracle और Microsoft जैसी दिग्गज कंपनियों ने मिलकर महज एक महीने के भीतर करीब 46,750 कर्मचारियों की छंटनी कर दी. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं.
AI में निवेश, लेकिन नौकरियों में कटौती
चौंकाने वाली बात यह है कि अरबों डॉलर के AI निवेश के बावजूद कंपनियां अपनी वर्कफोर्स घटा रही हैं. एक ओर जहां इनोवेशन और भविष्य की तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हजारों कर्मचारी अचानक नौकरी जाने और अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं. यह बदलाव टेक सेक्टर में तेजी से बदलते कामकाजी ढांचे की ओर इशारा करता है.
Meta में बड़ी कटौती की तैयारी
Meta करीब 8000 कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में है, जो इसके कुल वर्कफोर्स का लगभग 10 प्रतिशत है. कंपनी ने इन पदों को दोबारा न भरने का भी फैसला किया है. इसी के साथ Meta इस साल AI में करीब 135 बिलियन डॉलर निवेश करने की योजना बना रही है. कंपनी के सीईओ Mark Zuckerberg पहले ही संकेत दे चुके हैं कि AI के कारण भविष्य में बड़ी टीमों की जरूरत कम हो सकती है.
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Oracle में भी भारी छंटनी की खबर
Oracle ने भी बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की कटौती की है. हालांकि कंपनी ने आधिकारिक तौर पर आंकड़े साझा नहीं किए हैं, लेकिन रिपोर्ट्स और कर्मचारियों के बयान बताते हैं कि यह संख्या करीब 30,000 तक हो सकती है.
Microsoft का अलग तरीका
Microsoft ने सीधे छंटनी के बजाय एक अलग रास्ता अपनाया है. कंपनी ने अमेरिका में अपने लगभग 7 प्रतिशत कर्मचारियों, यानी करीब 8,750 लोगों को स्वैच्छिक बायआउट का विकल्प दिया है. अपने 51 साल के इतिहास में यह पहला मौका है जब कंपनी ने इस तरह का प्रोग्राम शुरू किया है.
आईटी सेक्टर और भारत पर असर
इतनी बड़ी संख्या में छंटनी का असर पूरे आईटी सेक्टर पर देखने को मिल सकता है. सैलरी पैकेज पर दबाव बढ़ेगा और नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज होगी. इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ सकता है, जहां इन कंपनियों के बड़े ऑपरेशंस और आउटसोर्सिंग सेंटर मौजूद हैं.
