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NGT की रोक बेअसर: दामोदर-कोनार नदी से धड़ल्ले से हो रहा बालू उठाव, दो ट्रैक्टर छोड़ने पर उठे सवाल

Bokaro: एनजीटी द्वारा मानसून अवधि को देखते हुए 10 जून से 15 अक्टूबर तक नदियों से बालू उठाव पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया...

Bokaro: एनजीटी द्वारा मानसून अवधि को देखते हुए 10 जून से 15 अक्टूबर तक नदियों से बालू उठाव पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन बेरमो अनुमंडल में इस आदेश की खुलेआम अनदेखी की जा रही है. दामोदर और कोनार नदी के विभिन्न घाटों से अवैध बालू खनन और परिवहन का सिलसिला लगातार जारी है.

एनजीटी के आदेश को ठेंगा दिखा रहे बालू माफिया

जानकारी के अनुसार, बालू के अवैध कारोबारी रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक नदियों से बेखौफ बालू निकाल रहे हैं. खेतको, असनापानी, होसिर, चलकरी, बेरमो खटाल क्षेत्र, फुसरो हिंदुस्तान पुल, छिलका पुल, लोहा पुल और डीवीसी ओवरब्रिज के नीचे कोनार नदी के घाटों से बड़े पैमाने पर बालू उठाव जारी है.

सरकारी राजस्व और पर्यावरण को हो रहा नुकसान

अवैध खनन के कारण जहां सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं नदियों के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. प्रतिबंध के बावजूद जारी इस गतिविधि ने प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

छापेमारी में तीन ट्रैक्टर जब्त, दो को मौके पर ही छोड़ा गया

बुधवार देर रात बेरमो अंचल अधिकारी (सीओ) संजीत कुमार ने गुप्त सूचना के आधार पर बोकारो थर्मल स्थित डिग्री कॉलेज के समीप छापेमारी की. कार्रवाई के दौरान अवैध बालू लदे तीन ट्रैक्टर जब्त किए गए. हालांकि जांच के नाम पर तीन में से दो ट्रैक्टरों को मौके पर ही छोड़ दिया गया, जबकि एक ट्रैक्टर को बोकारो थर्मल थाना के अवर निरीक्षक कृष्णा उरांव के सुपुर्द किया गया.

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दो ट्रैक्टर छोड़ने पर उठ रहे गंभीर सवाल

एनजीटी की सख्त पाबंदी के बावजूद दो बालू लदे ट्रैक्टरों को बिना किसी ठोस कार्रवाई के छोड़ दिए जाने की घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है. स्थानीय लोग और प्रबुद्ध नागरिक प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं कि जब बालू उठाव और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध है, तो पकड़े गए वाहनों को किस आधार पर छोड़ा गया.

बालू माफिया और तंत्र की सांठगांठ की चर्चा

क्षेत्र में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि अवैध बालू कारोबारियों और तंत्र के बीच कथित गठजोड़ के कारण एनजीटी के आदेश जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं. लोगों का कहना है कि यदि प्रतिबंध के बावजूद अवैध खनन जारी रहा, तो पर्यावरण और कानून दोनों की स्थिति और कमजोर होगी.

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