Ranchi: झारखंड में किसानों की आय दोगुनी करने के नाम पर शुरू की गई राज्य उद्यान विकास योजना अब भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में है. विभाग ने ओल और अदरक के बीज वितरण के लिए एक ही वित्तीय वर्ष में दो अलग-अलग तिथियों 13 अगस्त 2025 और 26 मार्च 2026 पर आदेश जारी कर करोड़ों की बंदरबांट का ऐसा ताना-बाना बुना है, जो भौतिक सत्यापन होते ही ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है.
मार्च की हड़बड़ी और चहेते ठेकेदारों का खेल
वित्तीय वर्ष खत्म होने के ठीक चार दिन पहले, 26 मार्च 2026 को आनन-फानन में 4.30 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की गई. आरोप है कि दुमका, गोड्डा और साहेबगंज जिलों में इस राशि का उपयोग बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन या सूचना के किया जा रहा है. सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ‘उद्यान मित्रों’ और ‘पंचायत प्रतिनिधियों’ को इस पूरी प्रक्रिया से बाहर रखा गया है, ताकि जिला उद्यान पदाधिकारी और आपूर्तिकर्ता की सांठगांठ से कागजी खानापूर्ति कर सारा पैसा निकाला जा सके.
एक ही योजना, दो आदेश: क्या है खेल?
पहला वार (13 अगस्त 2025): 98.50 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत कर पूरे राज्य के 24 जिलों में बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया.
दूसरा वार (26 मार्च 2026): इसी योजना के नाम पर 4.31 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि केवल चुनिंदा जिलों (दुमका, गोड्डा, साहेबगंज, रांची, लोहरदगा) के लिए जारी की गई.
गायब बीज, फर्जी क्लस्टर
नियमों के मुताबिक ओल और अदरक की खेती 25 हेक्टेयर के क्लस्टर में होनी चाहिए, ताकि किसानों को मार्केट लिंक मिल सके. लेकिन हकीकत इसके उलट है. रिपोर्टों के अनुसार, कुछ ‘चहेते’ किसानों को नाममात्र का बीज थमाकर फाइलों में बड़े-बड़े क्लस्टर खड़े कर दिए गए हैं. किसानों का आरोप है कि कार्यालय के रजिस्टर में बीज की मात्रा और क्षेत्र का जो ब्यौरा दर्ज है, जमीन पर उसका 10% भी मौजूद नहीं है.
उद्यान मित्रों की अनदेखी
सरकार का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी बीज वितरण योजना में स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि और उद्यान मित्र की अनुशंसा अनिवार्य है. लेकिन इन जिलों में इस नियम को ‘ठेंगे’ पर रखा गया है. उद्यान मित्रों को प्रक्रिया से दूर रखना इस बात का पुख्ता सबूत है कि विभाग किसी भी तरह की निगरानी से बचना चाहता था.
