Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में भाषाई राजनीति और प्रशासनिक सुधारों का मिला-जुला असर देखने को मिला. राज्य सरकार ने कुल 15 अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई, लेकिन सबकी नजरें क्षेत्रीय भाषाओं की सूची पर टिकी थीं. तमाम कयासों के विपरीत, भोजपुरी, अंगिका और मगही को फिलहाल क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में जगह नहीं मिल सकी है. बैठक में कांग्रेस मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इन भाषाओं को शामिल करने का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया. इस संवेदनशील विषय पर संतुलन बनाते हुए मुख्यमंत्री ने बीच का रास्ता निकाला है. उन्होंने घोषणा की कि अन्य भाषाओं को क्षेत्रीय सूची में शामिल करने के लिए एक विशेष समिति (कमेटी) का गठन किया जाएगा. यह समिति भाषाई आधार और जनभावनाओं का गहराई से अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद ही सरकार कोई अंतिम निर्णय लेगी.
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कैबिनेट ने जेटेड नियमावली को घटनोत्तर स्वीकृति दी
कैबिनेट ने जेटेड नियमावली को घटनोत्तर स्वीकृति दे दी है. राहत की बात यह है कि पुरानी नियमावली में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे अभ्यर्थियों को स्पष्टता मिली है. जहां एक तरफ 15 प्रस्तावों के जरिए विकास कार्यों को गति दी गई, वहीं भाषा के मुद्दे को समिति के पाले में डालकर सरकार ने फिलहाल बड़े राजनीतिक विवाद को टाल दिया है. अब राज्य की नजरें इस नई समिति के गठन और उसकी सिफारिशों पर टिकी हैं.
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