Ranchi: झारखंड में आपदा प्रबंधन को लेकर सरकार ने बड़ा और असरदार कदम उठाया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में ऐसे फैसले लिए गए हैं, जो सीधे तौर पर आम लोगों को राहत देने के साथ-साथ पूरे सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और जवाबदेह बनाएंगे.
सबसे बड़ा फैसला: सड़क हादसों में मुआवजा चार गुना
अब सड़क दुर्घटना में मौत होने पर पीड़ित परिवारों को 1 लाख नहीं, बल्कि सीधे 4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान मिलेगा. सरकार का यह फैसला हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगा और इसे मानवीय संवेदनशीलता से जुड़ा मजबूत कदम माना जा रहा है.
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राहत प्रक्रिया आसान भी, सख्त भी
सरकार ने अनुग्रह अनुदान की प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ उसमें सख्ती भी बढ़ाई है. अब मृतक के आश्रितों को उनके गृह जिले के उपायुक्त द्वारा सत्यापन के बाद ही राशि मिलेगी. इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और सही लाभार्थी तक मदद पहुंचेगी. साथ ही, डबल भुगतान रोकने के लिए स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी बीमा योजना से कवर है, तो वह या तो बीमा की राशि ले सकेगा या आपदा राहत—दोनों का लाभ एक साथ नहीं मिलेगा.
‘आपदा मित्र’ बनेंगे संकट के असली हीरो
दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज में चल रही ‘युवा आपदा मित्र’ योजना को अब और विस्तार दिया जाएगा. स्वयंसेवकों का डिजिटल डेटाबेस तैयार कर उसे इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम से जोड़ा जाएगा, ताकि आपदा के समय तुरंत मदद मिल सके. मुख्यमंत्री ने इनके लिए SOP तैयार करने और भत्ता देने का प्रस्ताव भी लाने को कहा है.
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डूबने की घटनाओं पर सख्त नजर, बढ़ेंगे प्रशिक्षित गोताखोर
राज्य में पानी में डूबने से हो रही मौतों को लेकर सरकार गंभीर है. 48 गोताखोरों के प्रशिक्षण की मंजूरी दी गई है. वहीं उनकी संख्या बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं. खास बात यह है कि इस अभियान में पुलिस, गृहरक्षक और महिलाओं की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी.
