विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने जेल में बंद निलंबित IAS अधिकारी विनय कुमार चौबे को बड़ा झटका देते हुए उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है. हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने मामले की गंभीरता और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका को देखते हुए उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया. यह मामला हजारीबाग में भूमी के अवैध म्यूटेशन से संबंधित है. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जो प्राथमिकी दर्ज की है उसके मुताबिक विनय कुमार चौबे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए वन भूमि को बिनय कुमार सिंह और स्निग्धा सिंह के नाम पर म्यूटेशन करने का दबाव बनाया था. अदालत में विनय चौबे की बेल का विरोध करते हुए ACB की ओर से कई गंभीर खुलासे किए गए हैं. ACB ने कोर्ट को बताया कि तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) अलका कुमारी ने अपने बयान में स्वीकार किया कि तत्कालीन डीसी विनय कुमार चौबे ने उन पर दबाव डाला और म्यूटेशन करने का निर्देश दिया जबकि CO ने उस वक्त आपत्ति जताई थी और कहा था कि जमीन गैरमजरूआ खास और जंगल प्रकृति की है.
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जांच में बड़े खुलासे, आय से अधिक संपत्ति और लेनदेन का मामला
ACB की जाँच में यह तथ्य भी सामने आया है कि इस अवैध कार्य के बदले भारी लेनदेन हुआ. अदालत ने यह पाया है कि विनय चौबे की आय उस अवधि के दौरान 2.20 करोड़ रुपये थी जबकि उनके खर्च और संपत्ति 3.47 करोड़ रुपये पाए गए. विनय चौबे की पत्नी और साले ब्रह्मास्त्र एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक हैं और इस कंपनी का उपयोग अवैध रूप से अर्जित धन को वैध बनाने (लेयरिंग) के लिए किया गया. वर्ष 2010 से 2015 के बीच इस कंपनी में लगभग 3.16 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए थे. अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि अगर विनय चौबे को जमानत पर रिहा किया जाता है तो इस बात की पूरी प्रबल संभावना है कि वह सह-अभियुक्तों और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं. विशेष रूप से तब, जब उनके अधीन काम करने वाले अधिकारियों ने ही उनके खिलाफ बयान दिए हैं.
