HAZARIBAGH: जीटी रोड स्थित चौपारण की दनुआ घाटी, जो अब ‘मौत की घाटी’ के रूप में कुख्यात हो चुकी है, के दिन अब बहुरने वाले हैं. इस खतरनाक घाटी में हो रहे आए दिन के हादसों को रोकने के लिए दिल्ली से लेकर रांची तक हलचल तेज हो गई है. बरही विधायक मनोज कुमार यादव ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर दनुआ घाटी की भयावह स्थिति से उन्हें अवगत कराया.
फ्लाईओवर बनेगा सुरक्षा कवच
विधायक मनोज यादव ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि दनुआ घाटी के तीखे मोड़ और ढलान के कारण यहाँ आए दिन भीषण सड़क हादसे होते हैं, जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. समस्या के स्थाई समाधान के लिए घाटी में फ्लाईओवर निर्माण का प्रस्ताव सड़क मंत्रालय को भेजा गया है. विधायक के अनुसार, फिलहाल इस प्रोजेक्ट की तकनीकी स्वीकृति मिलना बाकी है, लेकिन केंद्रीय मंत्री ने इस पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया है.
विधानसभा में भी उठा मुद्दा
दनुआ घाटी का मुद्दा केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि विधायक ने इसे झारखंड विधानसभा में भी प्रमुखता से रखा. उन्होंने सदन को बताया कि स्थानीय लोगों और यात्रियों की सुरक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है. उन्होंने दावा किया कि फ्लाईओवर के निर्माण से न केवल हादसों पर अंकुश लगेगा, बल्कि जीटी रोड पर सफर करने वाले हजारों वाहन चालकों को भी सुरक्षित रास्ता मिलेगा.
क्यों खतरनाक है दनुआ घाटी?
हजारीबाग और चतरा की सीमा पर स्थित दनुआ घाटी अपने संकरे मोड़ और लंबी ढलान के लिए जानी जाती है. भारी वाहनों के ब्रेक फेल होने या अनियंत्रित होने के कारण यहाँ हर महीने दर्जनों दुर्घटनाएं होती हैं. स्थानीय लोग लंबे समय से यहाँ बाईपास या फ्लाईओवर की मांग कर रहे थे, ताकि कीमती जानों को बचाया जा सके.
