भ्रष्टाचार के पैसे खपाने के लिए इस्तेमाल किया गया “ब्रह्मास्त्र”, पढ़िये ACB की वो दलीलें जिससे खुल गई हर परत

विनीत आभा उपाध्याय Ranchi : कानून की आँखों में धूल झोंककर भ्रष्टाचार की काली कमाई को सफेद’ करने का खेल अब बेनकाब...

विनीत आभा उपाध्याय

Ranchi : कानून की आँखों में धूल झोंककर भ्रष्टाचार की काली कमाई को सफेद’ करने का खेल अब बेनकाब हो चुका है. जेल में बंद IAS अधिकारी विनय चौबे की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं वे किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं. ACB ने विनय चौबे की याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि याचिकाकर्ता पर न केवल पद के दुरुपयोग बल्कि करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगे हैं.ACB की ओर से अदालत को बताया गया कि कैसे सरकारी जमीन के रिकॉर्ड के साथ खिलवाड़ किया गया. जिस जमीन का मालिक भगवान प्रसाद गुप्ता कभी था ही नही याचिकाकर्ता के दबाव में नीचे के अधिकारियों ने उसी के नाम पर म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की प्रक्रिया पूरी कर दी.

फर्जी म्यूटेशन और मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा, कंपनी के जरिए काली कमाई को सफेद करने का आरोप

नियम-कानूनों को ताक पर रखकर स्निग्धा सिंह और बिनय कुमार सिंह के पक्ष में जमीन का म्यूटेशन कराया गया. जिसके बाद अब सीधा सवाल उठता है जब वेंडर के पास मालिकाना हक ही नहीं था तो यह जादूई म्यूटेशन किसके इशारे पर हुआ? सबसे चौंकाने वाला खुलासा ब्रह्मास्त्र एजुकेशन प्राइवेट लिमिटेड को लेकर हुआ है. ACB की दलीलों के मुताबिक यह कंपनी शिक्षा के लिए नहीं बल्कि अवैध कमाई को लेयरिंग करने के लिए एक मुखौटे के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी. वर्ष 2010 से 2015 के बीच इस कंपनी के खाते में ₹3,16,81,597 की भारी-भरकम राशि नकद जमा की गई. इस कंपनी के निदेशक मंडली में कोई और नहीं बल्कि याचिकाकर्ता की पत्नी और साला काबिज हैं. इसी मनी ट्रेल और पैसों की लेयरिंग का खुलासा होने के बाद ACB ने विनय चौबे उनकी पत्नी स्वप्ना संचिता विनय सिंह उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, विनय चौबे के ससुर , साले और साले की पत्नी को भी आरोपी बनाया गया है.

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