ईचागढ़ में हाथी-मानव संघर्ष बढ़ा, वनरक्षी ने बालू माफिया को ठहराया जिम्मेदार

Saraikela : ईचागढ़ प्रखंड के हार्डआत गांव में जंगली हाथी के हमले में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत के...

Saraikela : ईचागढ़ प्रखंड के हार्डआत गांव में जंगली हाथी के हमले में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत के बाद वन विभाग ने गंभीर चिंता जताई है. वनरक्षी वशिष्ठ नारायण महतो ने कहा कि जल, जंगल और जमीन के दोहन तथा अवैध बालू खनन के कारण हाथी-मानव संघर्ष लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इसके लिए सिर्फ वन विभाग जिम्मेदार है या फिर हाथियों के प्राकृतिक आवास को खत्म करने वाले लोग भी उतने ही दोषी हैं.


अवैध खनन से बाधित हुआ हाथियों का रास्ता


जांच में सामने आया है कि कांची और करकरी नदी के किनारे रात-दिन जेसीबी और भारी वाहनों से अवैध बालू खनन हो रहा है. तेज रोशनी, शोर और लगातार आवाजाही से हाथियों का पारंपरिक कॉरिडोर बाधित हो गया है. इससे हाथी भटककर गांवों की ओर आ रहे हैं. हार्डआत गांव, जो स्वर्णरेखा नदी के किनारे स्थित है, वहां भी इसी कारण यह दुखद घटना हुई. विशेषज्ञों के अनुसार पिछले छह महीनों में ईचागढ़, नीमडीह और कुकड़ू क्षेत्र में हाथियों के हमले में नौ लोगों की मौत हो चुकी है.


ग्रामीणों से सतर्कता की अपील, प्रशासन करेगा कार्रवाई


वनरक्षी महतो ने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए आपदा पूर्व प्रबंधन पर जोर दिया है. उन्होंने ग्रामीणों से रात में जंगल और नदी किनारे न जाने, अवैध खनन की सूचना टोल फ्री नंबर 1800 345 1947 पर देने और हाथी दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचित करने की अपील की. वहीं डीएफओ ने घटना की जांच के लिए टीम गठित करने और मृतकों के परिजनों को चार चार लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही है. साथ ही अवैध खनन पर रोक के लिए पुलिस और खनन विभाग के साथ संयुक्त अभियान चलाया जाएगा. वनरक्षी ने कहा कि जंगल बचेगा तो हाथी बचेगा और हाथी बचेगा तो इंसान भी सुरक्षित रहेगा.

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