असम के रण में जेएमएम की ‘धमक’, सीएम हेमंत सोरेन ने कहा- ‘यह अंत नहीं, एक गौरवशाली शुरुआत है’

Ranchi: असम विधानसभा चुनाव के नतीजों और पार्टी के प्रदर्शन पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने...

Ranchi: असम विधानसभा चुनाव के नतीजों और पार्टी के प्रदर्शन पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम की जनता का आभार जताया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि असम की धरती पर जेएमएम का कदम महज राजनीतिक विस्तार की कवायद नहीं, बल्कि दशकों से उपेक्षित आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यकों के हक-अधिकार की एक वैचारिक क्रांति का आगाज़ है. हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में असम की जनता को ‘जोहार’ कहते हुए कहा कि बेहद सीमित समय और संसाधनों के बावजूद पार्टी ने जो आधार तैयार किया है, वह असम के भविष्य की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगा.

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सीमित संसाधन, अदम्य साहस : आंकड़ों में जेएमएम का प्रभाव

बिना किसी बड़े गठबंधन के और पहली बार पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरी जेएमएम ने असम में जो प्रदर्शन किया है, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है. मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ साझा किया कि पार्टी ने 16 सीटों पर चुनाव लड़कर अपनी पहचान दर्ज कराई. पहली ही कोशिश में जेएमएम 2 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही, जो यह दर्शाता है कि जनता ने पार्टी को विकल्प के रूप में स्वीकार कर लिया है. 7 विधानसभा सीटों पर पार्टी ने 15,000 से अधिक मत प्राप्त किए हैं. सोरेन ने कहा, यह परिणाम स्पष्ट करते हैं कि असम की जनता बदलाव चाहती है और जेएमएम उनकी उम्मीदों की नई धुरी बनकर उभरी है.

चाय बागान से पहचान तक : लड़ाई अब भी जारी है

हेमंत सोरेन ने असम के ज्वलंत मुद्दों पर प्रहार करते हुए कहा कि राज्य में आदिवासियों की स्थिति आज भी चिंताजनक है. उन्होंने उन बुनियादी समस्याओं को रेखांकित किया जिन्होंने जेएमएम को असम के चुनावी दंगल में उतरने के लिए प्रेरित किया. असम के आदिवासियों को अब तक अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा न मिलना, बागान मजदूरों को उचित मजदूरी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव, मूलवासियों को अपनी ही जमीन के अधिकार से वंचित रखा जाना, यह केवल एक चुनावी प्रयास नहीं, बल्कि अस्तित्व, पहचान और अधिकारों की लड़ाई है. असम में आदिवासियों की दयनीय स्थिति हमारे संघर्ष की नींव है.

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अभी तो यह शुरुआत है

हेमंत सोरेन ने कार्यकर्ताओं और असम के मतदाताओं में नई ऊर्जा भरते हुए कहा कि यह प्रदर्शन केवल एक शुरुआत है. उन्होंने विश्वास दिलाया कि आने वाले समय में संगठन और भी मजबूत होगा और आदिवासी समाज के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर इतनी मजबूती से उठाया जाएगा कि उन्हें नजरअंदाज करना नामुमकिन होगा. मुख्यमंत्री का यह रुख साफ संकेत देता है कि जेएमएम अब केवल झारखंड तक सीमित रहने वाली पार्टी नहीं रही, बल्कि वह पूर्वी भारत के वंचितों और आदिवासियों की एक राष्ट्रीय आवाज बनने की राह पर अग्रसर है. असम की जनता का समर्थन जेएमएम के लिए ‘शक्ति, प्रेरणा और नई ऊर्जा’ का वह स्रोत बन गया है, जो आने वाले समय में पूर्वोत्तर की राजनीति की दिशा तय करेगा.

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