थाना प्रभारी न बनें ‘भगवान’, वर्दी की गरिमा का रखें ख्याल, कार्यशाला का आयोजन कर दिया गया अच्छे व्यवहार करने का प्रशिक्षण

Ranchi: झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने राज्य के विभिन्न थानों में तैनात थाना प्रभारियों के व्यवहार को लेकर झारखंड पुलिस मुख्यालय के द्वारा...

Ranchi: झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने राज्य के विभिन्न थानों में तैनात थाना प्रभारियों के व्यवहार को लेकर झारखंड पुलिस मुख्यालय के द्वारा मंगलवार को एक कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें 80 की संख्या में थानेदार आए थे. थाना प्रभारी को कार्यशाला के दौरान बेहतर अनुसंधान करने समेत कई विषयों पर जानकारी दी गई. डीजीपी के निर्देश पर प्रशिक्षण निदेशालय के द्वारा आईटीएस होटवार में राज्यभर के थाना प्रभारी को अपने बैचमेट जूनियर अफसर और आम जनता से कैसे अच्छा व्यवहार किया जाए, इसको लेकर प्रशिक्षण दिया गया. इस प्रशिक्षण में झारखंड पुलिस के कई आईपीएस समेत कई पुलिस अधिकारी शामिल हुए. इस कार्यशाला में झारखंड पुलिस के अधिकारियों के द्वारा थाना प्रभारियों को अपने व्यवहार में सुधार लाने और कनीय पदाधिकारियों के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की नसीहत दी गई.

अहंकार और अशोभनीय व्यवहार पर झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने जताई थी चिंता:

थाना प्रभारी के अहंकार और अशोभनीय व्यवहार पर झारखंड पुलिस एसोसिएशन ने चिंता जताई थी. बीते 23 अप्रैल को झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश संयुक्त सचिव सह कोषाध्यक्ष राकेश कुमार पाण्डेय ने अपनी अपील में कहा है कि एसोसिएशन के संज्ञान में लगातार ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि थाना प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे कुछ सदस्य अपने ही अधीनस्थ कनीय पदाधिकारियों और यहां तक कि अपने बैचमेट्स के साथ भी अशोभनीय व्यवहार कर रहे हैं. कुछ पदाधिकारी थाना प्रभारी का पद पाते ही स्वयं को संगठन और मर्यादा से ऊपर समझने लगे हैं. उन्हें महसूस होने लगा है कि वे भगवान से भी ऊपर हैं. कनीय पदाधिकारियों की समस्याओं को अनसुना करना और उनके साथ भेदभाव करना अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है.

ALSO READ:  थाना प्रभारी न बनें भगवान, वर्दी की गरिमा का रखें ख्याल, झारखंड पुलिस एसोसिएशन की कड़ी चेतावनी-News Wave Jharkhand

बिचौलियों और चाटुकारिता पर कड़ा प्रहार:

एसोसिएशन ने उन पदाधिकारियों को भी आड़े हाथों लिया है जो वरीय अधिकारियों से अपनी नजदीकी का फायदा उठाकर बिचौलिये की भूमिका निभा रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, कुछ सदस्य अपने ही साथियों का शोषण करवाने में संलिप्त हैं, जो संगठन की एकजुटता के लिए एक बड़ा खतरा है. राकेश कुमार पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि जब ऐसे लोगों के स्वयं के सम्मान पर आंच आती है, तब वे एसोसिएशन की शरण में आते हैं, लेकिन पद पर रहते हुए वे संगठन के आदर्शों को भूल जाते हैं.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *