Ranchi: नदियों और पहाड़ों के संरक्षण को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच जमशेदपुर एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विमर्श का गवाह बनने जा रहा है. आगामी 22 और 23 मई को शहर के मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल में दो दिवसीय ‘पर्वत एवं नदी सम्मेलन’ का आयोजन किया जाएगा. इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य देश की जीवनदायिनी नदियों और पहाड़ों के अस्तित्व को बचाने के लिए ठोस कानूनी ढांचे की मांग करना और एक सशक्त ड्राफ्ट तैयार कर केंद्र सरकार को सौंपना है.
कानून का अभाव सबसे बड़ी चुनौती
आयोजन समिति की बैठक में विधायक सरयू राय ने कहा कि आजादी के दशकों बाद भी पहाड़ों और नदियों के संरक्षण के लिए कोई समर्पित कानून नहीं है. उन्होंने अरावली क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि स्पष्ट परिभाषा के अभाव में पहाड़ों का अस्तित्व खतरे में है. उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के माध्यम से एक ऐसा ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा जिसे भारत सरकार को सौंपा जा सके. यदि यह कानून बनता है तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा.
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संरक्षक और आयोजक
इस राष्ट्रीय सेमिनार के मुख्य आयोजक तरुण भारत संघ और युगांतर प्रकृति हैं. कार्यक्रम को जलपुरुष राजेंद्र सिंह और जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय का संरक्षण प्राप्त है. इसके अलावा आईआईटी (आईएसएम, धनबाद), जल बिरादरी और स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी इसमें भागीदारी कर रहे हैं.
समिति एवं विभागों का गठन
सम्मेलन के सफल संचालन के लिए 14 विभिन्न विभागों जैसे मीडिया समन्वय, यातायात, आवास और सांस्कृतिक विभाग का गठन किया गया है.
- संयोजक: पर्यावरणविद दिनेश मिश्र
- सह संयोजक: अंशुल शरण
- अध्यक्ष आयोजन समिति: मनोज कुमार सिंह
