Hazaribagh: अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रीय सचिव व बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने मंगलवार को बड़कागांव स्थित रोहाने कोल ब्लॉक से प्रभावित परिवारों और रैयतों की समस्याओं को लेकर उपायुक्त कार्यालय में दस्तक दी. अंबा प्रसाद के नेतृत्व में दर्जनों प्रभावित आदिवासी और रैयत डीसी ऑफिस पहुंचे, जहां उन्होंने उपायुक्त हेमंत सती और सदर अनुमंडल पदाधिकारी आदित्य पांडे के साथ विस्तृत बैठक की.
दशकों से रह रहे आदिवासियों को हटाने का विरोध
बैठक के दौरान अंबा प्रसाद ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि दशकों से जंगलों में रह रहे आदिवासी परिवारों को रोहाने कंपनी द्वारा जबरदस्ती हटाने का प्रयास किया जा रहा है, जो सरासर गलत है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उक्त भूमि से संबंधित मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय में लंबित है.

कानूनी स्थिति और ‘यथास्थिति’ का हवाला
पूर्व विधायक ने अधिकारियों को जानकारी दी कि वर्ष 2011-12 में भूमि अधिग्रहण के लिए जो जमीन क्रय की गई थी, वह कोल ब्लॉक निरस्त होने के बाद एनएमडीसीएल को आवंटित कर दी गई थी. उच्च न्यायालय के आदेशानुसार, जब तक अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक भूमि की यथास्थिति बनाए रखनी है और नामांतरण पर भी रोक है.
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अंबा प्रसाद ने मांग की कि जब तक न्यायालय का निर्णय नहीं आता, तब तक भूमि एनएमडीसीएल को हस्तांतरित न की जाए. मुआवजे और पुनर्वास की जिम्मेदारी एनएमडीसीएल द्वारा वहन की जाए. सीएनटी एक्ट का उल्लंघन कर खरीदी गई करीब 70 एकड़ भूमि के प्रभावितों को भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत लाभ मिले.
गैर-मजरूआ भूमि पर मुआवजे की मांग
अंबा प्रसाद ने गैर-मजरूआ भूमि पर बसे प्रभावित परिवारों के लिए सरकार के संकल्प के आधार पर उनकी संरचनाओं का मुआवजा, पुनर्स्थापन और पुनरवास राशि उपलब्ध कराने की भी पुरजोर वकालत की.
प्रशासन का आश्वासन
उपायुक्त और सदर एसडीओ ने अंबा प्रसाद एवं विस्थापितों की बातों को गंभीरता से सुना. अधिकारियों ने मामले की समीक्षा कर नियमानुसार उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया है.
मौके पर ये रहे मौजूद
इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य गीता देवी, समाजसेवी दीपक करमाली, महेंद्र मांझी, गंगाराम मांझी, जोपाल मांझी, तालो बेसरा, सुरेश हंसदा, जीवन हंसदा, लछमान मांझी, राजेंद्र मरांडी, छोटन मांझी, सोहन मांझी, सुनीता देवी, संजय वर्मा, रविन्द्र करमाली, गुलाब करमाली, सोनी देवी, सुमन देवी, सपना देवी, साझों देवी, पंचम करमाली, राजेंद्र करमाली, कृपाल कच्छप समेत अन्य ग्रामीण उपस्थित थे.
