बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहीं स्कूल बसें, क्या प्रशासन सिर्फ फोन और फाइन तक सीमित?

Ranchi: शहर में स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन भले ही बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही...

Ranchi: शहर में स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन भले ही बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. हर साल प्रशासन की ओर से कहा जाता है कि स्कूलों में सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा है, बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और निजी स्कूलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है. लेकिन हाल की जांच ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी है.

जांच में मिली कई खामियां

DTO रांची द्वारा राजधानी के कई बड़े और नामी स्कूलों की बसों और वैनों की जांच की गई. जांच के दौरान लगभग हर स्कूल की गाड़ियों में किसी न किसी प्रकार की कमी पाई गई. कहीं सुरक्षा उपकरण अधूरे मिले, कहीं जरूरी दस्तावेजों की कमी दिखी तो कहीं नियमों का खुला उल्लंघन सामने आया. कई वाहनों पर जुर्माना भी लगाया गया.

नियमों को गंभीरता से क्यों नहीं ले रहे स्कूल?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन की बार-बार चेतावनी और जांच अभियान के बावजूद स्कूल प्रबंधन नियमों को गंभीरता से क्यों नहीं ले रहा? क्या इन निजी स्कूलों को प्रशासन का डर नहीं रह गया है? बच्चों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर भी लगातार लापरवाही आखिर क्यों जारी है?

क्या सिर्फ जुर्माना ही कार्रवाई है?

अभिभावकों का कहना है कि हर साल जांच होती है, खामियां मिलती हैं, जुर्माना लगाया जाता है और फिर मामला वहीं खत्म हो जाता है. लेकिन उसके बाद यह देखने वाला कोई नहीं होता कि जिन कमियों को पकड़ा गया था, उन्हें सुधारा भी गया या नहीं.

यदि कोई आम वाहन चालक नियम तोड़े तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होती है, लेकिन जब मामला स्कूल बसों का आता है, जिनमें सैकड़ों बच्चों की जिंदगी जुड़ी होती है, तब कार्रवाई केवल औपचारिक क्यों नजर आती है?

लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि बार-बार एक ही स्कूलों की बसों में खामियां मिल रही हैं, तो आखिर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या सिर्फ कुछ हजार रुपये का फाइन लेकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है?

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अभिभावकों में बढ़ रहा गुस्सा

स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में लगातार नाराजगी बढ़ रही है. उनका कहना है कि वे हर महीने भारी फीस देते हैं, ताकि उनके बच्चे सुरक्षित माहौल में स्कूल जा सकें, लेकिन जब जांच में लगातार खामियां सामने आ रही हैं, तो यह साफ है कि बच्चों की सुरक्षा के साथ समझौता किया जा रहा है.

दिखावटी कार्रवाई के आरोप

अभिभावकों का आरोप है कि प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के बीच केवल दिखावटी कार्रवाई हो रही है. अगर प्रशासन वास्तव में सख्त होता, तो बार-बार नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर बड़ी कार्रवाई होती, बसों का परिचालन रोका जाता और जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई होती.

बैठकों और आदेशों का क्या हुआ?

स्कूलों की मनमानी को लेकर कई बार बैठकें हुईं, निर्देश जारी हुए और सख्ती के दावे किए गए. लेकिन स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है. अभिभावकों का कहना है कि हर बार सिर्फ आश्वासन मिलता है, लेकिन जमीन पर कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं देता.

अब सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासन की सारी कवायद केवल खानापूर्ति बनकर रह गई है? क्योंकि अगर सख्ती वास्तव में होती, तो बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों की खुलेआम अनदेखी शायद इतनी आसानी से नहीं हो पाती.

बच्चों की सुरक्षा पर कब होगी सख्त कार्रवाई?

रांची में हजारों बच्चे हर दिन स्कूल बसों और वैनों से सफर करते हैं. ऐसे में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है. इसके बावजूद यदि स्कूल प्रबंधन लगातार नियम तोड़ रहा है, तो यह बेहद गंभीर मामला है.

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