Hazaribagh: हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ (कुसुम्भा गांव) में हुए चर्चित नाबालिग हत्याकांड मामले में शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने मामले पर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए महत्वपूर्ण दस्तावेजों का अवलोकन किया.
सीलबंद साक्ष्य अदालत को सौंपे गए
सरकार की ओर से कोर्ट को जानकारी दी गई कि इस मामले में घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य, आरोपी और मृतका से संबंधित एफएसएल जांच की सीलबंद रिपोर्ट जमा कर दी गई है. इसके अतिरिक्त, मृतका की “मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट” भी अदालत को सौंपी गई है. कोर्ट ने इन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लेते हुए विस्तृत सुनवाई के लिए 11 मई की तिथि निर्धारित की है.

ALSO READ: जेएमएम का बीजेपी पर हमला, कहा- झारखंड से ओडिशा तक नफरत की राजनीति फैलाने की कोशिश
अंधविश्वास और बर्बरता का मामला
गौरतलब है कि पुलिस अनुसंधान (कांड संख्या 42/2026) के अनुसार, यह मामला तंत्र-मंत्र के फेर में “नरबलि” से जुड़ा है, जिसमें मृतका की माँ रेशमी देवी और उसके सहयोगी भीम राम समेत तीन लोग वर्तमान में जेल में हैं. पिछली सुनवाइयों में कोर्ट ने इस मामले की तुलना निर्भया कांड जैसी अमानवीयता से करते हुए इसे मानवता पर कलंक बताया था.
प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त टिप्पणी
अदालत ने पूर्व में इस बात पर भी नाराजगी जताई थी कि घटना 24 मार्च को होने के बावजूद प्राथमिकी दर्ज करने और आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी की गई. कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि समाचार पत्रों के माध्यम से यह मामला संज्ञान में नहीं आता, तो शायद इसकी गंभीरता उजागर नहीं हो पाती. फिलहाल, कोर्ट की सख्त निगरानी में जांच प्रक्रिया चल रही है.
