न्यूज वेव खासः श्रम विभाग: निर्माण कार्य में लगे 11 लाख से अधिक मजदूर सरकारी योजनाओं के दायरे में, असंगठित क्षेत्र के 16 लाख श्रमिकों का हुआ रजिस्ट्रेशन

Ranchi: झारखंड सरकार के श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग ने श्रमिकों के सशक्तीकरण और उद्योगों की सुगमता की दिशा में एक बड़ी...

Ranchi: झारखंड सरकार के श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग ने श्रमिकों के सशक्तीकरण और उद्योगों की सुगमता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. कॉम्प्रिहेंसिव लेबर मैनेजमेंट सिस्टम के आंकड़ों के अनुसार श्रम विभाग ने विभिन्न श्रम अधिनियमों के तहत प्राप्त लाखों आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए रिकॉर्ड 35 लाख से अधिक आवेदनों का निपटारा किया है. असंगठित क्षेत्र के मजदूरों से लेकर भारी उद्योगों के फैक्ट्री लाइसेंस तक, विभाग का डिजिटल पोर्टल वन-स्टॉप सॉल्यूशन साबित हो रहा है.

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असंगठित और प्रवासी श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन

झारखंड में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का पंजीकरण सबसे बड़े स्तर पर हुआ है. असंगठित श्रमिक सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008 के तहत कुल 16.95 लाख आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 16 लाख से अधिक आवेदनों को स्वीकृत कर लिया गया है. वहीं, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम के तहत 12.75 लाख मजदूरों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें से 11.94 लाख से अधिक अब सरकारी योजनाओं के दायरे में आ चुके हैं. प्रवासी मजदूरों के मामले में भी 2.69 लाख पंजीकरण के साथ विभाग उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है.

फैक्ट्री और उद्योगों के लिए सुगम हुई राह

औद्योगिक विकास की रीढ़ माने जाने वाले फैक्ट्री एक्ट, 1948 के तहत विभाग ने शानदार प्रदर्शन किया है. फैक्ट्री लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आए 8,686 आवेदनों में से 8,652 का निपटारा किया जा चुका है. इसी तरह, मैप अप्रूवल और नए लाइसेंस के हजारों मामलों को समय सीमा के भीतर निपटाया गया है.

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दुकान और प्रतिष्ठानों का डिजिटल विस्तार

झारखंड के छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए झारखंड दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम, 1953 के तहत रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया बेहद आसान हुई है. पोर्टल पर कुल 45,136 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 43,402 को हरी झंडी मिल चुकी है.

ठेका श्रम और अंतरराज्यीय प्रवासी नियमन

ठेका मजदूरी (कॉन्ट्रैक्ट लेबर) व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए 41,301 ठेकेदार लाइसेंस आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 35,519 को मंजूरी दी गई. इसके अलावा, मोटर ट्रांसपोर्ट वर्क और बॉयलर एक्ट के तहत भी लंबित मामलों की संख्या न्यूनतम स्तर पर बनी हुई है.

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