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‘नशा मुक्ति’ दावों को ठेंगा दिखा रही हकीकत, हाथों में किताब की जगह खैनी मल रहे नौनिहाल

Pakur : एक तरफ जहां जिला प्रशासन पाकुड़ को नशा मुक्त बनाने के लिए बड़े-बड़े जागरूकता अभियान चला रहा है, रैलियां निकाली...

Pakur : एक तरफ जहां जिला प्रशासन पाकुड़ को नशा मुक्त बनाने के लिए बड़े-बड़े जागरूकता अभियान चला रहा है, रैलियां निकाली जा रही हैं और शपथ दिलाई जा रही है, वहीं दूसरी ओर जिले की से ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहां नशा मुक्ति के इन दावों के बीच मासूम बच्चे नशे की गिरफ्त में फंसता नजर आ रहा है, ताजा मामला पाकुड़ जिले से सामने आया है, जहां नाबालिग बच्चे सरेआम खैनी बनाते और नशे का सेवन करते देखे जा रहे हैं, जिस उम्र में इन बच्चों के हाथों में कलम और किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में वे तंबाकू की पुड़िया रगड़ रहे हैं.

जागरूकता अभियान बनाम जमीनी हकीकत

जिला प्रशासन लगातार ‘नशा मुक्ति अभियान’ के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का प्रयास कर रहा है, स्कूल-कॉलेजों से लेकर गांवों तक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन, इन अभियानों का असर बच्चों पर कितना पड़ रहा है, यह तस्वीर आपको बताने के लिए काफी है, बड़ा सवाल है कि क्या प्रशासन के अभियान सिर्फ कागजों और फोटो तक सीमित हैं? अगर जमीनी स्तर पर काम हो रहा है, तो छोटे बच्चों तक तंबाकू और नशा कैसे पहुंच रहा है?विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी उम्र में नशे की लत न केवल बच्चों के स्वास्थ्य को बर्बाद कर रही है, बल्कि उन्हें अपराध की दुनिया की ओर भी धकेल सकती है, स्थानीय लोगों का कहना है कि नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता और उचित निगरानी की कमी के कारण बच्चे इसकी चपेट में आ रहे हैं.

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