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हजारीबाग में जल सहिया के जाली हस्ताक्षर से लाखों की निकासी!

Hazaribagh: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-02 के तहत चल रही योजनाओं में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और सरकारी राशि के कथित गबन...

Hazaribagh: स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-02 के तहत चल रही योजनाओं में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और सरकारी राशि के कथित गबन का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है. विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के नरकी कला टोला नावाडीह निवासी जल सहिया गेंदो कुमारी ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, पंचायत प्रतिनिधियों और संवेदकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. शिकायत उपायुक्त कार्यालय तक पहुंचते ही विभागीय हलकों में खलबली मच गई है. उपायुक्त को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि ग्राम जल स्वच्छता समिति नरकी कला के नाम पर हुए कार्यों में जल सहिया के फर्जी हस्ताक्षर कर लाखों रुपये की सरकारी राशि की निकासी कर ली गई. शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी और कागजों में उनके नाम और हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर भुगतान निकाल लिया गया.

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क्या लूटने का संगठित नेटवर्क सक्रिय?

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सरकारी दस्तावेजों में जाली हस्ताक्षर किसने किए और विभागीय जांच-पड़ताल के बिना भुगतान कैसे हो गया? शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस पूरे खेल में संवेदक, पंचायत प्रतिनिधि और विभागीय कर्मियों की मिलीभगत से सरकारी योजनाओं को लूटने का संगठित नेटवर्क सक्रिय है. इतना ही नहीं, शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि घोटाले को दबाने के लिए उन्हें ही झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की जा रही है. आवेदन के साथ कई दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं, जिन्हें शिकायतकर्ता ने फर्जी निकासी और अनियमितता का प्रमाण बताया है.

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डीसी ने जांच के दिए आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त कार्यालय ने कार्यपालक अभियंता, पीएचईडी हजारीबाग को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की जांच कर दोषियों पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. हालांकि गांव और विभागीय गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि यदि बिना वास्तविक हस्ताक्षर के सरकारी राशि निकल सकती है तो फिर योजनाओं की निगरानी की व्यवस्था आखिर किसके भरोसे चल रही है? सूत्रों की मानें तो यह मामला सिर्फ एक पंचायत तक सीमित नहीं हो सकता. चर्चा है कि यदि निष्पक्ष और गहन जांच हुई तो कई और पंचायतों और योजनाओं में भी इसी तरह के फर्जी भुगतान और बंदरबांट का खुलासा हो सकता है. ग्रामीणों के बीच यह मामला अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है और लोग पूछ रहे हैं कि स्वच्छता के नाम पर आने वाला सरकारी पैसा आखिर जमीन पर लग रहा है या फाइलों और फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए गायब हो रहा है. अब निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं.

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