Hazaribagh: हजारीबाग जिले में बालू का संकट अब प्रशासनिक विफलता का पर्याय बनता जा रहा है. बालू घाटों के टेंडर में हो रही लगातार देरी ने न केवल विकास कार्यों की रफ्तार रोक दी है, बल्कि आम आदमी के अपने घर के सपने को भी ‘दूज का चांद’ बना दिया है. हैरानी की बात यह है कि टेंडर प्रक्रिया के समय पर पूरा न होने से बालू की किल्लत चरम पर है और निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ गए हैं.
टेंडर में देरी, माफियाओं की चांदी
एक तरफ सरकार टेंडर की औपचारिकताओं में उलझी है, वहीं दूसरी तरफ बालू माफिया इस सुस्ती का जमकर फायदा उठा रहे हैं. बाजार में बालू की कृत्रिम कमी पैदा कर इसे चार गुना अधिक दामों पर बेचा जा रहा है. जिन्हें काम बहुत जरूरी है, वे मजबूरी में रात के अंधेरे में अवैध तरीके से ऊंचे दामों पर बालू मंगवा रहे हैं.

ALSO READ: तलाक की अफवाहों के बीच चर्चा में मौनी रॉय की शादी, जानिए कौन हैं उनके पति सूरज नांबियार?
सिर पर मानसून, पर प्रशासन ‘बेफिक्र’
नियमतः 10 जून से मानसून के कारण खनन पर रोक लग जाएगी. टेंडर में हो रही इस देरी का मतलब है कि अब मानसून से पहले घाटों का संचालन शुरू होना लगभग नामुमकिन लग रहा है. यदि अगले कुछ दिनों में प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो आने वाले चार महीनों तक जिले में बालू का अकाल पड़ना तय है.
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
इस पूरे मामले पर जिला खनन पदाधिकारी अजीत कुमार का कहना है कि टेंडर और बंदोबस्ती की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है. उन्होंने दावा किया है कि अगले दो-तीन दिनों में कागजी कार्रवाई को गति दी जाएगी, ताकि एक सप्ताह के भीतर स्थितियां कुछ सामान्य हो सकें. हालांकि, धरातल पर जनता अब भी टेंडर के सफल होने का इंतजार कर रही है.
