Ranchi: रांची-मुरी सड़क चौड़ीकरण परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजे को लेकर जिला भू-अर्जन कार्यालय, रांची ने सख्त रुख अख्तियार किया है. विभाग ने विभिन्न गांवों के उन रैयतों (जमीन मालिकों) के लिए अंतिम चेतावनी जारी की है. जिन्होंने अब तक अपनी जमीन से संबंधित दस्तावेज कार्यालय में जमा नहीं किए है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर दावा पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया, तो मुआवजे की राशि सीधे एल.ए. कोर्ट में स्थानांतरित कर दी जाएगी.
दस्तावेज न मिलने से रुका है करोड़ों का भुगतान
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के अनुसार, रांची-मुरी सड़क परियोजना के तहत कई मौजों (गांवों) की जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है. प्रशासन ने संबंधित जमीन मालिकों को ‘हितबद्ध व्यक्ति’ माना है, लेकिन संबंधित रैयतों द्वारा अब तक अपनी जमीन के वैध दस्तावेज और साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. इस कारण करोड़ों रुपये की मुआवजा राशि का भुगतान लंबित है.
दावा पेश करने के लिए आवश्यक दस्तावेज
रैयतों को सलाह दी गई है कि वे निम्नलिखित दस्तावेजों के साथ जिला भू-अर्जन कार्यालय, रांची में अपना आवेदन जमा करें. अद्यतन लगान रसीद, वैध रैयती प्रमाण पत्र और वंशावली, आधार कार्ड और बैंक पासबुक की छायाप्रति, रजिस्टर-2 की प्रति या निबंधित केवाला, सहमति पत्र/बंटवारा नामा और दो पासपोर्ट साइज फोटो, शपथ पत्र.
प्रशासन की चेतावनी, रुचि नहीं दिखाई तो कोर्ट जाएगा पैसा
सूचना में साफ कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा (15 दिन) के भीतर आवेदन प्राप्त नहीं होते हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि संबंधित रैयत को मुआवजा प्राप्त करने में कोई रुचि नहीं है. ऐसी स्थिति में राशि को कोर्ट में ‘रेफर’ कर दिया जाएगा, जिसके बाद पैसा निकालने की प्रक्रिया काफी जटिल और लंबी हो सकती है.
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