मेडिकल कालेज या ‘अवैध धंधों’ का अड्डा? शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज, हजारीबाग में मरीजों की जेब पर डाका, नशाखोरी और दलाली से कराह रहा सदर अस्पताल

Hazaribag: हजारीबाग का गौरव कहे जाने वाले शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (सदर अस्पताल) के परिसर में इन दिनों स्वास्थ्य सेवाओं...

Hazaribag: हजारीबाग का गौरव कहे जाने वाले शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (सदर अस्पताल) के परिसर में इन दिनों स्वास्थ्य सेवाओं से ज्यादा ‘अवैध उगाही’ की चर्चा गर्म है.  यह मामला तब और तूल पकड़ गया जब स्थानीय दुकानदारों और जागरूक नागरिकों ने एकजुट होकर अस्पताल अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा. आरोप बेहद गंभीर हैं, दिन में मरीजों का आर्थिक शोषण और रात के अंधेरे में नशाखोरी का खेल.

​मजबूरी का फायदा: फोटोकॉपी के नाम पर लूट

​ज्ञापन में स्थानीय लोगों ने खुलासा किया कि अस्पताल परिसर के भीतर संचालित कुछ फोटोकॉपी और अन्य दुकानें सेवा के नाम पर ‘लूट’ का केंद्र बन गई हैं. दूर-दराज से आए गरीब मरीजों से इन सेवाओं के बदले मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है.

​दलाली का जाल: आरोप है कि दुकानदार दिन भर अस्पताल के वार्डों के इर्द-गिर्द दलाली की गतिविधियों में लिप्त रहते हैं.

​रास्ते में बाधा: इन दुकानों के कारण अस्पताल के गलियारों में इस कदर भीड़ उमड़ती है कि गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर पर ले जाना भी दूभर हो जाता है.

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​अंधेरा होते ही बदल जाता है मंजर

​स्थानीय लोगों का सबसे खौफनाक आरोप नशाखोरी को लेकर है. शिकायतकर्ताओं के अनुसार, सूरज ढलते ही अस्पताल परिसर कुछ असामाजिक तत्वों और अवैध गतिविधियों का सुरक्षित अड्डा बन जाता है. इससे न केवल अस्पताल की गरिमा धूमिल हो रही है, बल्कि वहां भर्ती महिला मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है.

​प्रशासन को अल्टीमेटम: ‘कार्रवाई न हुई तो हम भी घुसेंगे अंदर’

​ज्ञापन सौंपने वाले दुकानदारों ने कड़े लहजे में चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इन अवैध दुकानों और अतिक्रमण को जल्द नहीं हटाया, तो बाहर के दुकानदार भी विरोध स्वरूप अस्पताल परिसर के अंदर अपनी दुकानें सजाने को मजबूर होंगे.

​प्रमुख मांगें

अस्पताल को अतिक्रमण मुक्त कर स्ट्रेचर का रास्ता साफ किया जाए.अवैध रूप से अधिक शुल्क वसूलने वाली दुकानों की जांच हो. नशाखोरी रोकने के लिए रात्रि सुरक्षा पुख्ता की जाए. ​हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन सौंपते हुए नागरिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि अब गेंद अस्पताल प्रबंधन के पाले में है. देखना यह होगा कि प्रशासन ‘सफेद वर्दी’ के इस संस्थान से ‘अवैध धंधों’ का दाग धो पाता है या नहीं.

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