हजारीबाग: विधायक प्रतिनिधि की गुंडागर्दी या सत्ता का नशा? फोटो खींचने पर युवक को बनाया बंधक, अब पीड़ित ने लगाया ‘उग्रवादी कनेक्शन’ का आरोप

Hazaribagh : झारखंड के हजारीबाग में सत्ता के संरक्षण में पल रही दबंगई का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोकतंत्र...

Hazaribagh : झारखंड के हजारीबाग में सत्ता के संरक्षण में पल रही दबंगई का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और आम नागरिक की सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, सदर विधायक प्रदीप प्रसाद के प्रतिनिधि सुमन राय पर एक दलित युवक को बंधक बनाने, मोबाइल छीनने और जान से मारने की धमकी देने का सनसनीखेज आरोप लगा है मामला तब और गरमा गया जब पीड़ित पक्ष ने कैमरे के सामने आकर आरोपी के ‘उग्रवादी इतिहास’ होने का आरोप लगाया.

एक फोटो और ‘विधायक’ वाली हनक

पूरा विवाद कटकमसांडी प्रखंड के एक निर्माणाधीन सामुदायिक भवन से शुरू हुआ, खबर है कि सरोज सिंह नामक व्यक्ति ने गांव के एक युवक को भवन की फोटो खींचने भेजा था। बस, यही बात विधायक प्रतिनिधि सुमन राय को चुभ गई, आरोप है कि सुमन राय ने आव देखा न ताव, उस युवक को बंधक बना लिया और उसका फोन छीनकर सरोज सिंह को फोन पर ऐसी-ऐसी गालियां दीं जिसे सभ्य समाज में सुना नहीं जा सकता.

“जला दूंगा घर, मिटा दूंगा नाम”— वायरल ऑडियो के बाद अब वीडियो धमाका

सोशल मीडिया पर एक ऑडियो पहले से ही आग की तरह फैल रहा था, लेकिन अब पीड़ित सरोज सिंह ने वीडियो बयान जारी कर मामले को विस्फोटक बना दिया है. सरोज सिंह ने सीधे तौर पर कहा: मेरी गलती सिर्फ इतनी थी कि मैंने फोटो खींचने भेजा. इसके बदले मुझे गालियां मिलीं, घर जलाने की धमकी मिली और मेरे भेजे गए लड़के को बंधक बनाया गया. उन्होंने आगे सुमन राय पर आरोप लगाया है की उनका इतिहास उग्रवादी संगठनों से रहा है, वह जेल जा चुका है. आखिर ऐसे व्यक्ति को विधायक प्रतिनिधि कैसे बनाया गया?

भाजपा कार्यकर्ता ही असुरक्षित?

हैरानी की बात यह है कि आरोप लगाने वाले सरोज सिंह खुद को भारतीय जनता पार्टी का पुराना कार्यकर्ता बता रहे हैं. उन्होंने अपनी ही पार्टी के सांसद, विधायक और संगठन से गुहार लगाई है कि क्या भाजपा में अब गुंडागर्दी करने वालों को संरक्षण मिलेगा? उन्होंने अपनी जान का खतरा बताते हुए प्रशासन से सुरक्षा की मांग की है.

सुलगते सवाल: जिसका जवाब हजारीबाग मांग रहा है

1. प्रशासन मौन क्यों? सरोज सिंह का आरोप है कि 15 दिन पहले भी उन्हें विधायक के दबाव में थाने में 6 घंटे बिठाया गया. क्या पुलिस विधायक प्रतिनिधि के इशारों पर काम कर रही है?

2. क्या छिपा रहा है निर्माण कार्य? आखिर एक सामुदायिक भवन की फोटो खींचने से सुमन राय को इतनी मिर्ची क्यों लगी? क्या निर्माण में कोई बड़ा घोटाला छिपा है?

3. अपराधिक छवि को संरक्षण? अगर आरोपी का पुराना आपराधिक और उग्रवादी रिकॉर्ड है, तो उसे ‘विधायक प्रतिनिधि’ जैसा जिम्मेदार पद कैसे दिया गया?

जनता की अदालत में मामला

फिलहाल, इस वायरल वीडियो और ऑडियो ने हजारीबाग की राजनीति में भूचाल ला दिया है, एक तरफ पीड़ित का रोष है, तो दूसरी तरफ सत्ता का रसूख. इस पूरे मामले पर निष्पक्ष नजर बनाए हुए है. अब देखना यह है कि कानून के हाथ सुमन राय तक पहुँचते हैं या मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा.

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