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बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशील पुलिसिंग हेतु विशेष किशोर पुलिस इकाई सशक्तिकरण कार्यक्रम का पांचवां सत्र आयोजित

Chaibasa: आज चाईबासा के पुलिस लाइन स्थित कांफ्रेंस हॉल में ‘बाल-संवेदनशील पुलिसिंग: मामले का दस्तावेजीकरण और बाल-संवेदनशील प्रक्रियाएं’ विषय पर एक दिवसीय...

Chaibasa: आज चाईबासा के पुलिस लाइन स्थित कांफ्रेंस हॉल में ‘बाल-संवेदनशील पुलिसिंग: मामले का दस्तावेजीकरण और बाल-संवेदनशील प्रक्रियाएं’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का उद्देश्य विशेष किशोर पुलिस इकाइयों (SJPU) को सशक्त बनाना और बाल संरक्षण से संबंधित प्रक्रियाओं को और अधिक संवेदनशील व प्रभावी बनाना था.

इस कार्यक्रम का आयोजन पश्चिम सिंहभूम पुलिस विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से एवं सेंटर फॉर चाइल्ड राइट्स (CCR), नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), पश्चिम सिंहभूम के तकनीकी सहयोग से किया गया. कार्यशाला में रांची जिले के विभिन्न थानों से आए 39 बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWPO) ने भाग लिया.

JJ एक्ट और POCSO कानून पर दिया गया प्रशिक्षण

पश्चिम सिंहभूम पुलिस अधीक्षक श्री अमित रेनू ने सभी पुलिस थानों के बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों को JJ अधिनियम और POCSO अधिनियम के तहत उचित मामले के दस्तावेजीकरण और बाल संवेदनशील प्रक्रियाओं के महत्व पर चर्चा की गई और उसका संचालन हेतु निर्देश दिए.

इस अवसर पर श्री मंसूर गोप (मेजर, पुलिस लाइन) ने बताया कि यूनिसेफ़ एवं CCR, NUSRL के सहयोग से सभी बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारियों का सात चरणों में संवेदनशील कार्यक्रम किया जाएगा, जिसका आज पांचवां चरण सम्पन्न हुआ.

बाल अधिकार और संवेदनशील पुलिसिंग पर हुई चर्चा

कार्यक्रम की शुरुआत श्री अनिरुद्ध सरकार (CCR, NUSRL) के स्वागत भाषण और प्रशिक्षण-पूर्व मूल्यांकन प्रश्नावली और उसका समाधान से हुई.

तकनीकी सत्रों में श्री गौरव, बाल संरक्षण अधिकारी- NUNV, यूनिसेफ़ ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 एवं झारखण्ड किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) नियम, 2017 में निहित बाल-संवेदनशील पुलिसिंग के मुख्य सिद्धांत – गरिमा, भेदभाव-रहित दृष्टिकोण, गोपनीयता और बाल-हित सर्वोपरि रखने जैसे मुद्दों के साथ-साथ बालकों के विरुद्ध अपराध (बाल भिक्षावृत्ति, मादक पदार्थों की तस्करी आदि) की पहचान और संवेदनशील कार्यवाही की प्रक्रिया पर चर्चा की.

इसके अतिरिक्त सीडब्ल्यूपीओ (CWPO) की भूमिका एवं उत्तरदायित्व – बाल अनुकूल प्रक्रियाएं, पुलिस थानों में बालमित्र वातावरण, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई, प्रोबेशन अधिकारी आदि के साथ समन्वय, अभिलेख एवं रिपोर्टिंग आदि विषयों पर विस्तार से जानकारी साझा की गई. उन्होंने किशोर मामलों से निपटने के लिए भूमिका-निर्वाह, केस स्टडी और उत्तेजनात्मक अभ्यासों के माध्यम से प्रशिक्षण भी प्रसारित किया.

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केस स्टडी और समूह चर्चा के जरिए दिया गया प्रशिक्षण

कार्यक्रम के मुख्य सत्रों में बाल विवाह, लैंगिक शोषण और विधि से संघर्षरत बच्चों (CCL) से जुड़े मामलों पर केस स्टडी आधारित अभ्यास करवाया गया, जिसका संचालन गौरव कुमार ने किया. इसी कड़ी में श्री मोहम्मद समीम (बाल कल्याण समिति सदस्य) ने प्रतिभागियों के क्षमता आकलन एवं आगामी रणनीति पर समूह चर्चा की. सत्र के दौरान श्री अनिरुद्ध सरकार ने पालक देखभाल और उसके बाद की देखभाल योजनाओं के बारे में जानकारी दी.

इस कार्यक्रम में पीसीआई इंडिया के सलाहकार श्री हिमांशु जेना भी उपस्थित थे और उन्होंने बाल विवाह को समाप्त करना जैसे मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए. कार्यक्रम का समापन पुलिस लाइन अधिकारी श्री मंसूर गोप, चाईबासा से स्वीकृति प्राप्त कर धन्यवाद ज्ञापन के साथ तीसरे चरण के सशक्तिकरण कार्यक्रम का समापन किया गया.

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