Hazaribag: कहने को तो हजारीबाग एक स्मार्ट शहर की ओर कदम बढ़ा रहा है, लेकिन हकीकत की जमीन (या यूं कहें कि सड़कें) कुछ और ही बयां कर रही हैं. शहर की मुख्य धमनियां मानी जाने वाली सड़कें NH 100 और NH 522- इन दिनों विकास की नहीं, बल्कि प्रशासनिक बदहाली की कहानी लिख रही हैं. सड़कों की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि राहगीरों को अब सफर नहीं, बल्कि अपनी जान बचाने के लिए ‘जंग’ लड़नी पड़ रही है.
रेलवे ओवरब्रिज बना ‘तालाब’, ग्वालटोली से सुल्ताना तक नरक जैसा सफर
शहर के मुख्य प्रवेश द्वार और रेलवे ओवरब्रिज के पास की स्थिति सबसे भयावह है. यहाँ सड़कों पर इतने गहरे गड्ढे हैं कि जलजमाव के कारण यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढा. सबसे शर्मनाक स्थिति ग्वालटोली से लेकर सुल्ताना तक की है. यह नेशनल हाईवे का हिस्सा होने के बावजूद आज चलने लायक भी नहीं बचा है. धूल के गुबार और उखड़ी हुई सड़कें चीख-चीख कर विभाग की नाकामी बयां कर रही हैं.

एम्बुलेंस में ‘सांसों’ पर संकट
सबसे दुखद तस्वीर सदर अस्पताल जाने वाले रास्तों की है. आनंद चौक से छठ तालाब और मिशन हॉस्पिटल रोड पर एम्बुलेंस इन गड्ढों में फंसकर रह जाती हैं. गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए यह सफर किसी सजा से कम नहीं है. स्थानीय लोगों का कहना है कि झटकों की वजह से मरीजों की जान पर बन आती है, लेकिन प्रशासन मौन है. ग्वालटोली मार्ग पर हिचकोलों के कारण गंभीर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ने को मजबूर हैं.
नगर निगम के ‘नाक’ के नीचे लापरवाही
ताज्जुब की बात यह है कि नगर निगम कार्यालय के ठीक सामने ही सड़क कई जगह से टूटी हुई है. इंद्रपुरी चौक, पीटीसी चौक और जिला मोड़ तक सड़कों पर गहरे गड्ढे किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं.
जिम्मेदारी का खेल: सड़कों के निर्माण का जिम्मा नगर निगम, RCD और NHAI के पास है, लेकिन तीन-तीन विभागों के होने के बावजूद सुध लेने वाला कोई नहीं है.
अधिकारियों का बहाना: NHAI के अधिकारी मरम्मत के काम को “बारिश के बाद” शुरू करने का पुराना बहाना दोहरा रहे हैं.
जाम और अतिक्रमण का ‘डबल अटैक’
रही-सही कसर अतिक्रमण ने पूरी कर दी है. आधी सड़क पर दुकानों और अवैध कब्जों का कब्जा है, जिससे दिनभर शहर ट्रैफिक जाम की गिरफ्त में रहता है. दोपहिया वाहन चालक आए दिन फिसल कर घायल हो रहे हैं. स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए भी यह रास्ता जानलेवा साबित हो रहा है.
